Home झारखंड नक्सलियों के आईईडी से घायल 6 वर्षीय मासूम हाथी की इलाज में देरी के कारण मौत
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नक्सलियों के आईईडी से घायल 6 वर्षीय मासूम हाथी की इलाज में देरी के कारण मौत

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सारंडा के घने जंगल में नक्सलियों द्वारा लगाये गये आईईडी की चपेट में आने से 6 वर्षीय हाथी गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसकी शनिवार रात इलाज में देरी के कारण मौत हो गयी। इससे यह साफ हो गया कि सारंडा के बीहड़ों में मनुष्य के साथ वन जीव भी अब सुरक्षित नहीं है। बता दें कि आईईडी की चपेट में आने के बाद से घायल हाथी के एक पैर में गंभीर जख्म था और उसके पूरे शरीर में तेजी से संक्रमण फैल चुका था। शरीर से अधिक रक्तस्राव होने से उसकी जान चली गयी। 

मिली जानकारी के अनुसार, यह विस्फोट समठा वन क्षेत्र के तिरिलपोशी इलाके में विगत 27 जून को हुआ था, जहां नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए पहले से आईईडी प्लांट किया था। दुर्भाग्यवश, एक मासूम हाथी इस आईईडी की चपेट में आ गया और उसका एक पैर बुरी तरह फट गया था। घायल हाथी की तलाश और ट्रेसिंग ऑपरेशन में हुई देरी के 8 दिन बाद आरसीसीएफ (जमशेदपुर) स्मिता पंकज और डीएफओ (सारंडा) अविरुप सिन्हा के नेतृत्व में झारखंड-ओडिशा वन विभाग और पशु कल्याण संस्था वनतरा (Vanatara) की संयुक्त टीम ने सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटों की कड़ी मेहनत के बाद टीम ने जंगल के भीतर घायल हाथी को खोज निकाला। सारंडा जंगल के दीघा से वन विभाग की टीम उसे जराइकेला लेकर आई थी। यहां इलाज के दौरान कल रात उसकी मौत हो गयी। 

वन विभाग की टीम को 4 जुलाई को ही हाथी का लोकेशन मिल चुका था। वनतरा की विशेषज्ञ पशु चिकित्सा टीम शुक्रवार को ही पहुंच गई थी, जिसके बाद शनिवार को पूरी सतर्कता के साथ उपचार शुरू किया गया। हाथी को बेहोश करने के लिए सेडेटिव इंजेक्शन दिया गया, ताकि उसका उपचार जंगल में ही शुरू किया जा सके। स्थिति इतनी गंभीर थी कि हाथी को जंगल से बाहर लाना संभव नहीं था, इसलिए जंगल में ही अस्थायी टेंट, दवाएं, पानी और सभी आवश्यक संसाधनों के साथ इलाज किया जा रहा था। बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए ट्रैकुलाइज कर देर रात जंगल से जराईकेला लाया गया था। 

घायल मासूम हाथी की मौत रक्तस्राव और संक्रमण फैलने से हुई। काफी नाजुक हालत में वनतारा (जामनगर, गुजरात) के डॉक्टरों और वन विभाग की टीम लगातार घायल हाथी के पास मौजूद रही। हाथी का पैर बुरी तरह फट चुका था और पूरे शरीर में संक्रमण फैल गया था। अधिक रक्तस्राव होने से उसकी स्थिति काफी नाजुक हो गई थी।  वन विभाग के अनुसार हाथी के बच्चा का रविवार को पोस्टमार्टम किया जायेगा। इसके बाद जंगल में ही उसे दफना दिया जायेगा।c

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