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पंचपरगनिया संस्कृति का उत्सव: भादर मिलन में गूंजे गीत, नृत्य और संकल्प

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गांव-गांव अखाड़ा बने, तभी बचेगी हमारी विरासत: डॉ. करमचंद्र अहीर

बुंडू : पंचपरगनिया भाषा प्रेमियों द्वारा सूर्य मंदिर, बुंडू की पवित्र भूमि पर आयोजित चौथा भादर मिलन समारोह एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी बना। यह आयोजन न केवल लोक परंपराओं की पुनर्स्थापना का प्रयास था, बल्कि पंचपरगनिया भाषा और उसकी विलुप्त होती कला-संस्कृति को पुनर्जीवित करने का संकल्प भी।

समारोह की शुरुआत पारंपरिक पूजा और वंदना गीतों से हुई, जिसमें राजकिशोर स्वांसी और पुरेंद्र नाथ अहीर की स्वर लहरियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अध्यक्षता कर रहे डॉ. गोविन्द महतो ने इस आयोजन को सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया।

मुख्य अतिथि डॉ. करमचंद्र अहीर ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा –  “हर गांव में अखाड़ा बने, तभी जीवित रहेगी हमारी कला और संस्कृति।” उनकी यह पुकार पंचपरगनिया क्षेत्र के सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक आह्वान थी।

अतिथियों ने अपने विचारों को साझा किया :

  • डॉ. विनोद कुमार ने पंचपरगनिया को टीआरएल की नौ भाषाओं का प्रतिनिधि बताते हुए इसे सांस्कृतिक विविधता का केंद्र कहा।
  • डॉ. तारकेश्वर सिंह मुंडा ने साहित्यिक विकास की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भाषा को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना हमारा दायित्व है।
  • डॉ. लखींद्र मुंडा ने गीतों के माध्यम से कला-संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया।
  • सुरेश चंद्र महतो ने इसे एकता और समरसता का उत्सव बताया।
  • भूतनाथ प्रमाणिक ने सरकार से पंचपरगनिया शिक्षकों की शीघ्र बहाली की मांग की।

लोक नृत्य की थिरकन, परंपरा की झलक

रांची विश्वविद्यालय, डोरंडा कॉलेज, सिल्ली कॉलेज, महिला महाविद्यालय सहित कई संस्थानों के विद्यार्थियों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ पंचपरगनिया गीतों और नृत्यों की प्रस्तुति दी। इन कलाओं ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी दिया।

साहित्यकारों और समाजसेवियों की गरिमामयी उपस्थित

इस आयोजन में गोरेन्द्रनाथ गोंझू, डॉ. वासुदेव महतो, जयप्रकाश उरांव, कृष्ण सिंह मुंडा, राजकुमार बिंझिया, रामदुर्लभ सिंह मुंडा, सैनाथ मुंडा, सुरेंद्र अहीर, गोपाल सिंह मुंडा, हलधर अहीर, सहदेव महतो सहित अनेक कला प्रेमियों ने भाग लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया।

समापन और संकल्प

विद्यासागर यादव ने धन्यवाद ज्ञापन में सभी प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए पंचपरगनिया भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण हेतु निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।

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