
रिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक
पतरातु बड़कागांव,केरेडारी एवं पतरातु क्षेत्र में एनटीपीसी एवं उसकी संबद्ध कंपनियों (अडानी, ऋत्विक माइनिंग, बीजीआर, एनएमडीसी, एनटीपीसी पतरातु आदि) द्वारा की जा रही अवैध भूमि अधिग्रहण, पुलिस अत्याचार एवं ग्रामीणों के शोषण के खिलाफ पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव एवं बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने आज प्रभावित एवं विस्थापित ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल के साथ माननीय राज्यपाल महोदय से मुलाकात की।
ग्रामीणों ने राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें पकड़ी बरवाडीह, गोंदलपुरा, मोइत्रा, बादाम, केरंडारी, चट्टी बारियातु,नॉर्थ ईस्ट कोल ब्लॉकों एवं एनटीपीसी पतरातु में कंपनियों द्वारा जिला प्रशासन एवं पुलिस को आर्थिक लाभ देकर ग्रामीणों पर अत्याचार, फर्जी मुकदमे, मारपीट, मोबाइल-मोटरसाइकिल छीनने, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार एवं तिरंगे झंडे का अपमान जैसी घटनाओं का जिक्र किया गया। ज्ञापन में मांग की गई कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत उचित मुआवजा, रोजगार, प्रदूषण से सुरक्षा एवं अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएं तथा श्री अनिल पलटा जी के नेतृत्व में स्वतंत्र जांच समिति गठित कर दोषी अधिकारियों एवं कंपनी प्रतिनिधियों पर कार्रवाई की जाए।
मुलाकात के दौरान पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव ने कहा केवल भूमि का मामला नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के मौलिक अधिकारों, गरिमा एवं जीवन का सवाल है। पुलिस का दुरुपयोग कर कंपनियां अवैध कब्जा कर रही हैं, जबकि कानून बदल चुका है। राज्यपाल महोदय ने हमारी बातें ध्यान से सुनीं और आश्वासन दिया कि ऑफिस शुरू होते ही इस पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सोमवार तक का समय लिया है।
पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कहा, “पिछले कई महीनों से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। महिलाओं, वृद्धों एवं युवाओं पर अत्याचार हो रहा है। हमने राज्यपाल से मांग की है कि जांच समिति गठित हो, फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं और ग्रामीणों को उनका हक मिले। हमें उम्मीद है कि माननीय राज्यपाल इस मामले में न्याय सुनिश्चित करेंगे।
प्रभावित ग्रामीणों के प्रतिनिधि ने बताया कि मुलाकात के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि अब उनकी आवाज सुनी जाएगी। उन्होंने कहा हम शांतिपूर्ण तरीके से अपना हक मांग रहे हैं, लेकिन पुलिस एवं कंपनियां मिलकर हमें दबा रही हैं। राज्यपाल से मिलकर हमें लगा कि अब न्याय की उम्मीद है।
राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि ज्ञापन प्राप्त हो गया है और सोमवार को कार्यालय खुलते ही इस पर आवश्यक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
इस घटनाक्रम से प्रभावित क्षेत्रों में चर्चा है कि क्या अब जिला प्रशासन एवं पुलिस पर कार्रवाई होगी और क्या ग्रामीणों को भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत उनका हक मिल पाएगा।
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