
हज़ारीबाग।
फाहिमा एकेडमी स्कूल परिसर में आयोजित साइंस एग्ज़ीबिशन, नो फायर कुकिंग एवं आर्ट एंड क्राफ्ट प्रदर्शनी ने शिक्षा के साथ-साथ रचनात्मकता और नवाचार का शानदार संगम प्रस्तुत किया। इस आयोजन में विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच, कल्पनाशीलता और व्यावहारिक ज्ञान ने उपस्थित अतिथियों को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम में आईसेक्ट यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. प्रमोद कुमार नायक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं एनसीसी कमांडर कैप्टन शत्रुघ्न पांडेय, डीएसपी प्रशांत कुमार, हॉली क्रॉस स्कूल वोकेशनल की प्राचार्या सिस्टर स्टेला एवं यूथ राइटर विपिन कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्या फरहा फातमी ने की, जबकि विद्यालय सचिव अहमद अली ने अतिथियों का स्वागत करते हुए फाहिमा एकेडमी की शैक्षणिक उपलब्धियों एवं शिक्षण दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।

साइंस एग्ज़ीबिशन में दिखी वैज्ञानिक सोच की चमक
साइंस एग्ज़ीबिशन में विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, तकनीकी नवाचार और दैनिक जीवन से जुड़े वैज्ञानिक प्रयोगों पर आधारित आकर्षक मॉडल प्रस्तुत किए।
सीनियर वर्ग में कक्षा 9 एवं 8 के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
नो फायर कुकिंग और आर्ट एंड क्राफ्ट बने आकर्षण का केंद्र
नो फायर कुकिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने बिना आग के स्वादिष्ट, पौष्टिक और सृजनात्मक व्यंजन तैयार कर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
वहीं आर्ट एंड क्राफ्ट प्रदर्शनी में छात्रों की कलात्मक सोच, रंगों की सजीवता और हस्तकला कौशल ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
शिक्षकों के समर्पण से सफल हुआ आयोजन
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों का अहम योगदान रहा।
हसरत अली, बेलाल अहमद, राहुल कुमार, कुणाल कुमार, सोमनाथ कुमार, राजन कुमार, सिकंदर कुमार, मनोज प्रसाद, श्रवण कुमार, माज़दा खातून, पल्लवी राणा एवं नाजिया परवीन के अथक प्रयासों की सभी अतिथियों ने मुक्त कंठ से सराहना की।
अतिथियों ने की विद्यार्थियों की जमकर प्रशंसा
अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए आत्मविश्वास के साथ तैयार करते हैं।
तालियों की गूंज, उत्साह और प्रेरणादायक वातावरण के बीच कार्यक्रम का समापन हुआ, जो फाहिमा एकेडमी के इतिहास में एक स्मरणीय अध्याय बन गया।
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