
पाकुड़ ब्यूरो जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट
हिरणपुर (पाकुड़): एक मामूली सा लगने वाला विवाद शनिवार को ऐसी दर्दनाक कहानी में बदल गया, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। जगतपुर गांव में ताड़ के पेड़ों को लेकर चल रही खींचतान ने उस वक्त भयावह रूप ले लिया, जब भतीजों ने अपनी ही “बड़ी मां” की बेरहमी से हत्या कर दी।
गांव में खेत के किनारे खड़े तीन ताड़ के पेड़ लंबे समय से विवाद की जड़ बने हुए थे। ये पेड़ परिवार के दो भाइयों के हिस्से में थे, लेकिन जब विजय हांसदा ने अपने हिस्से का पेड़ बेचने की बात कही, तो घर के अन्य लोगों ने इसका विरोध कर दिया। इस मुद्दे पर पहले पंचायत भी बैठी, समझाने की कोशिशें हुईं, लेकिन मनमुटाव खत्म नहीं हुआ।
शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे वही पुराना विवाद फिर भड़क उठा। देखते ही देखते कहासुनी गाली-गलौज में बदली और फिर हाथापाई शुरू हो गई। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि परिवार के लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे हो उठे।
इसी बीच, परिवार की बुजुर्ग महिला पार्वती सोरेन—जिन्हें घर में सभी “बड़ी मां” कहकर बुलाते थे—बीच-बचाव करने आगे आईं। उनका मकसद सिर्फ इतना था कि परिवार टूटने से बच जाए, लेकिन किसे पता था कि उनकी यही कोशिश उनकी जिंदगी की आखिरी कोशिश बन जाएगी।
आरोप है कि गुस्से में अंधे भतीजों—नरेन हांसदा, चरण हांसदा, अजय हांसदा और मनोज हांसदा—ने सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने “बड़ी मां” को ही निशाना बना लिया और पास पड़े पत्थर से उनके सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिया। वार इतना क्रूर था कि पार्वती सोरेन वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़ीं और कुछ ही पलों में उनकी सांसें थम गईं।
घटना के बाद गांव में चीख-पुकार मच गई। जिस आंगन में कभी हंसी-खुशी गूंजती थी, वहां मातम का सन्नाटा पसर गया। परिजन बदहवास हो उठे, और पूरे इलाके में इस निर्मम हत्या की चर्चा फैल गई।
सूचना मिलते ही हिरणपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल पत्थर भी जब्त कर लिया गया है। मामले में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि रिश्तों के टूटने और इंसानियत के मरने की कहानी बन गई है—जहां “बड़ी मां” जैसे पवित्र रिश्ते को भी गुस्से और लालच ने कुचल दिया।
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