
पाकुड़ ब्यूरो जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट
पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद बांसलोई नदी से अवैध बालू उठाव बदस्तूर जारी है। हालात यह हैं कि पूरे इलाके में ‘हफ्ता राज’ का खुला खेल चल रहा है और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं।
हर ट्रैक्टर से ₹13,500 साप्ताहिक वसूली का आरोप
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बरमसिया, रांगा, कॉलोनी समेत कई नदी घाटों पर दिन-रात ट्रैक्टरों से बालू की ढुलाई हो रही है। आरोप है कि इस अवैध कारोबार को चलाने के लिए हर ट्रैक्टर से करीब ₹13,500 प्रति सप्ताह वसूला जा रहा है। यह संगठित ‘हफ्ता सिस्टम’ माफियाओं को खुली छूट दे रहा है।

कोर्ट के आदेश की खुली अवहेलना
जानकारी के मुताबिक, इस क्षेत्र में न्यायालय द्वारा बालू उठाव पर रोक लगाई गई है। इसके बावजूद नियम-कानून को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर खनन जारी है, जो कानून व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
नदी पर संकट, सरकार को करोड़ों का नुकसान
लगातार हो रहे अवैध खनन से बांसलोई नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। वहीं, बिना राजस्व के बालू उठाव से राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
उठते सवाल, जिम्मेदार कौन?
कोर्ट की रोक के बावजूद खनन क्यों जारी है?
किसके संरक्षण में चल रहा यह ‘हफ्ता राज’?
प्रशासन की चुप्पी—लापरवाही या मिलीभगत?
कब रुकेगी बांसलोई नदी की लूट?
कार्रवाई का इंतजार
मामले के उजागर होने के बाद भी प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और वे जल्द सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अब सबकी नजर प्रशासन पर है—क्या ‘हफ्ता राज’ पर लगेगी लगाम या यूं ही चलता रहेगा बांसलोई नदी की लूट का खेल?
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