राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने नीट पेपर लीक होने और परीक्षाएं रद्द होने पर केंद्र की मोदी सरकार पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यादव ने कहा कि नीट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बार-बार पेपर लीक हो जाना मोदी सरकार की साख और कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। बता दें कि NTA संस्था NEET (मेडिकल), JEE Main (इंजीनियरिंग), UGC NET (नेट) और CUET (विश्वविद्यालय प्रवेश) जैसी परीक्षाएं आयोजित करता है।यादव ने कहा, दो वर्ष पूर्व 2024 में भी नीट परीक्षा के दौरान पेपर लीक हुआ था, जिस कारण पूरे देश में युवा छात्रों एवं विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया गया था। लेकिन उस दौरान भारी विरोध के बावजूद मोदी सरकार ने परीक्षाएं रद्द नहीं कीं। वहीं, जब 2026 के नीट पेपर लीक का मामला फिर उजागर हुआ, तो इस बार परीक्षाएं रद्द कर दी गईं।
हजारों करोड़ रु. खर्च होते हैं परीक्षा पर
यादव ने कहा कि देश एक गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और नीट जैसी परीक्षा के लिए संस्था का लगभग हजारों करोड़ रु. खर्च होता है। ऐसी स्थिति में पेपर लीक होना और परीक्षा रद्द करना अत्यंत चिंता का विषय है। कहा कि नीट पेपर लीक में भाजपाई दलाल हावी हैं। NTA संस्था में भाजपा और संघ विचारक पदाधिकारियों की मिलीभगत के कारण बार-बार पेपर लीक हो रहा है और 30 लाख से लेकर 50 लाख रु. में बेचे जा रहे हैं। मतलब NTA व्यापार का केंद्र बिंदु बन गया है।
सिंडिकेट गिरोह पर सख्त कार्रवाई की जाए
कैलाश यादव का स्पष्ट कहना है कि नीट पेपर लीक मामला अत्यंत गंभीर विषय है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन परीक्षाओं में स्वायत्त संस्था का निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्च कोटि का प्रमाण देना इनकी जिम्मेदारी है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर मोदी सरकार अपनी विफलता को छुपाने के लिए CBI जांच कराने का निर्णय लिया है। एक लिहाज से यह उचित निर्णय है, लेकिन मोदी सरकार की साख और विफलता सार्वजनिक हुई है। ये अपनी नाकामी से भाग नहीं सकते। यादव ने मांग की है कि NTA स्वायत्त संस्था को बंद किया जाए और इनके चेयरमैन सहित पूरी टीम को गिरफ्तार कर कठोर कार्रवाई की जाए एवं पेपर लीक के सिंडिकेट गिरोह पर सख्त कार्रवाई की जाए।
Leave a comment