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DBT योजना से बढ़ी पारदर्शिता, बिहार को मिले 49 हजार करोड़ रुपये

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Khabar365news

DBT अब देश में सरकारी सहायता पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुकी है। शुरुआत में इस व्यवस्था को लेकर कई तरह की शंकाएं और विरोध देखने को मिले थे लेकिन अब इसके सकारात्मक परिणाम साफ दिखाई दे रहे हैं। डीबीटी के जरिए सरकार सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में राशि भेज रही है जिससे बिचौलियों की भूमिका लगभग खत्म हो गई है।

2025-26 में बिहार को DBT के माध्यम से 49,622.73 करोड़ रुपये मिले 

पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार ने बिहार को डीबीटी के माध्यम से 49,622.73 करोड़ रुपये जारी किए। यह पूरी राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाई गई। इससे सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार पर काफी हद तक रोक लगी है। पहले योजनाओं की राशि नकद या चेक के माध्यम से दी जाती थी जिसमें गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग की संभावना बनी रहती थी। अब डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने इस समस्या को काफी कम कर दिया है।

चंपारण जिले 87 लाख लोगों को मिला डीबीटी का लाभ

बिहार में डीबीटी लाभार्थियों की कुल संख्या 17.37 करोड़ बताई गई है। इनमें सबसे अधिक लाभार्थी पूर्वी चंपारण जिले में हैं जहां करीब 87 लाख लोगों को डीबीटी का लाभ मिला। इसके बाद समस्तीपुर और मधुबनी जिलों का स्थान है। राज्य में पहले से ही इंदिरा आवास योजना, साइकिल योजना और पोशाक योजना जैसी योजनाओं में सीधे खाते में राशि भेजने की व्यवस्था लागू थी। इन योजनाओं के अच्छे परिणामों के बाद डीबीटी को व्यापक स्तर पर लागू किया गया।

केंद्र सरकार की 328 योजनाओं में डीबीटी व्यवस्था वर्तमान में लागू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डीबीटी को देशभर में मजबूत व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक तय समय पर पहुंच रहा है। साथ ही सरकारी धन के रिसाव पर भी रोक लगी है। डीबीटी व्यवस्था को सफल बनाने के लिए लाभार्थियों का बैंक खाता आधार से लिंक होना जरूरी माना गया है। वर्तमान में केंद्र सरकार की 328 योजनाओं में डीबीटी व्यवस्था लागू है।

पूरे देश में वर्ष 2025-26 के दौरान 6.17 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए। बिहार के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश को भी बड़ी राशि मिली। इन राज्यों में लाभार्थियों की संख्या अधिक होने और योजनाओं की राशि में अंतर के कारण भुगतान ज्यादा हुआ। डीबीटी व्यवस्था को अब जनकल्याण योजनाओं में पारदर्शिता और सुशासन का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।

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