गुमला जिले के सिसई प्रखंड अंतर्गत हेसागुटु कल्हुटोली गांव में अधूरी सड़क निर्माण कार्य ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। हेसागुटु से कल्हुटोली तक बनाई जा रही सड़क पर केवल पत्थर डालकर काम अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे आवागमन बेहद कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों तथा मरीजों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के कई बच्चे इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं, लेकिन अधूरी सड़क और जगह-जगह पड़े पत्थर के कारण उन्हें जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है। वहीं बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि बारिश शुरू होने के बाद स्थिति और गंभीर हो जाएगी, क्योंकि सड़क पर पानी जमा होने से आवागमन लगभग ठप हो सकता है।
धूल और पत्थरों के बीच चलना मुश्किल
कांग्रेस के पूसो मंडल अध्यक्ष जितेंद्र लोहरा समेत कई ग्रामीणों ने सड़क निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क के साथ-साथ पुल-पुलिया का निर्माण भी अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। ग्रामीणों ने सरकार पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि केवल कागजों पर विकास कार्य दिखाने के लिए सड़क निर्माण शुरू किया जाता है, लेकिन उसे पूरा कराने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जाती। उनका कहना है कि गर्मी में धूल और पत्थरों के बीच चलना मुश्किल हो गया है, जबकि बारिश के मौसम में हालात और बदतर होने की आशंका है।
आंदोलन करने को मजबूर
वहीं भाजपा के पूर्व विधायक कमलेश उरांव ने कहा कि राज्य में हेमंत सोरेन की सरकार बनने के बाद सड़क विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई इलाकों में सड़क निर्माण शुरू तो किया जाता है, लेकिन उसे समय पर पूरा नहीं कराया जाता, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भाजपा के पूर्व सांसद सुदर्शन भगत ने भी कहा कि यह समस्या केवल गुमला जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में अधूरे सड़क निर्माण कार्य देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और लोगों को बेहतर सुविधाएं देने का दावा तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसकी गंभीरता नजर नहीं आती। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क निर्माण पूरा नहीं कराया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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