राज्य में वर्ष 2027 के अप्रैल-मई में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए पंचायती राज विभाग के निर्णय के अनुसार, पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा ‘ट्रिपल टेस्ट’ कराया जाएगा, जो इस साल जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है। यह टेस्ट वर्ष 2027 के अप्रैल-मई में संभावित पंचायत चुनावों के लिए पिछड़ा वर्ग (OBC-1 और OBC-2) तथा ओबीसी महिलाओं की सीटों को जनसंख्या के आधार पर आरक्षित करने का आधार बनेगा। इस प्रक्रिया को गति देने के लिए आयोग में सदस्य सचिव की पोस्टिंग भी कर दी गई है।
मैन पावर की कमी: एजेंसी हायर करेगा पिछड़ा वर्ग आयोग
पिछड़ा वर्ग आयोग वर्तमान में कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। इस समस्या से निपटने और ट्रिपल टेस्ट को समय पर पूरा करने के लिए आयोग किसी बाहरी एजेंसी की हायर करेगा। इससे पहले नगर निकाय चुनावों के दौरान भी आयोग ने एजेंसी हायर की थी, जिसके लिए दो बार टेंडर जारी करने पड़े थे।
2022 के चुनाव में ओबीसी आरक्षण बना था बड़ा राजनीतिक मुद्दा
वर्ष 2022 के पंचायत चुनावों में ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण ओबीसी वर्ग को आरक्षण नहीं मिल सका था। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार उन सीटों को सामान्य घोषित कर चुनाव कराए गए थे, जहां ओबीसी उम्मीदवारों ने सामान्य सीटों से चुनाव लड़ा। आयोग का पूर्ण गठन न होने और आरक्षण न मिलने के मुद्दे पर भाजपा ने तत्कालीन राज्य सरकार को जमकर घेरा था, जिससे यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था।
चुनाव से पहले सरकार को पूरे करने होंगे कार्य
1. सुप्रीम कोर्ट के मानकों के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले सरकार और आयोग को निम्नलिखित तीन महत्वपूर्ण कार्य अनिवार्य रूप से पूरे करने होंगे:
2. आयोग की अंतिम रिपोर्ट: पिछड़ा वर्ग आयोग पंचायतों का दौरा कर ओबीसी की कुल जनसंख्या और उनकी राजनीतिक भागीदारी का अंतिम डेटा तैयार करेगा।
3. आरक्षण सीमा तय करना: यह सुनिश्चित किया जाएगा कि SC, ST और OBC का कुल मिलाकर कुल आरक्षण 50% की कानूनी सीमा से अधिक न हो।
4. रोटेशन और वार्डवार आरक्षण: एकत्रित डेटा के आधार पर रोटेशन प्रणाली लागू कर यह तय किया जाएगा कि कौन सी पंचायत या सीट ओबीसी के लिए आरक्षित की जाएगी।
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