झारखंड में सरकारी अस्पतालों के लिए मेडिकल उपकरण खरीद में बड़ी अनियमितता का मामला सामने आया है। CAG की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया से सरकारी खजाने को 8.67 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि मेरिल डायग्नोस्टिक कंपनी को राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन ने जुलाई 2023 में दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था, लेकिन इसके बावजूद उसे झारखंड में टेंडर में शामिल होने और ठेका हासिल करने की अनुमति दे दी गई।
दूसरे राज्यों से महंगी दर पर खरीदी गई मशीनें
ऑडिट में पाया गया कि टेंडर में ऐसी शर्तें रखी गईं जो व्यवहारिक नहीं थीं। सेमी-ऑटोमेटेड बायोकेमिस्ट्री एनालाइज़र के लिए प्रतिवर्ष 36 हजार टेस्ट की क्षमता मांगी गई, जबकि इसका कोई ठोस आधार नहीं मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन मशीनों की कीमत अन्य राज्यों में 4.15 लाख से 4.99 लाख रुपये प्रति यूनिट थी, उन्हें झारखंड में अधिक दरों पर खरीदा गया। इससे सरकार को करीब 4.24 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा।
10 साल का खर्च भी छिपाया गया
CAG रिपोर्ट के अनुसार, 6 अगस्त 2024 को हुए डेमो में मेरिल डायग्नोस्टिक की मशीनें जरूरी तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतरी थीं। मशीनों में HL-7 प्रोटोकॉल आधारित LAN पोर्ट और Bi-Directional LIS जैसी सुविधाएं नहीं थीं, फिर भी कंपनी को योग्य घोषित कर दिया गया। इसके अलावा, वित्तीय बोली का मूल्यांकन करते समय 10 साल के रिएजेंट खर्च को शामिल नहीं किया गया। यदि पूरी लागत जोड़ी जाती तो श्री किशन कंपनी सबसे कम बोलीदाता होती, लेकिन प्रक्रियागत नियमों को नजरअंदाज कर मेरिल डायग्नोस्टिक को ही ठेका दे दिया गया।
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