जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। शनिवार को शहर के दो बड़े सरकारी अस्पतालों पहला परसुडीह स्थित सदर अस्पताल और दूसरा एमजीएम अस्पताल में दो अलग-अलग मरीजों की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों और प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। एक तरफ जहां सदर अस्पताल में कमर दर्द का इंजेक्शन लेने के कुछ ही देर बाद एक हाइवा चालक की जान चली गई, वहीं दूसरी तरफ एमजीएम अस्पताल में समय पर इलाज न मिलने से एक महिला मरीज ने दम तोड़ दिया। दोनों ही मामलों में परिजनों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद अस्पताल प्रशासनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
इंजेक्शन देने के बाद बिगड़ी तबीयत
दरअसल, पहला मामला परसुडीह स्थित सदर अस्पताल का है। जेम्को आजाद बस्ती निवासी 42 वर्षीय भवनेश्वर मंडल शनिवार रात कमर दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार, डॉक्टर ने जांच के बाद उन्हें दवा और कमार दर्द का एक इंजेक्शन दिया। इलाज के बाद वे घर लौट आये, लेकिन कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। सीने में जलन और बेचैनी की शिकायत के बाद वे बेहोश हो गये। आनन-फानन में उन्हें दोबारा सदर अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना शनिवार रात करीब 10.30 बजे की है। मृतक के परिजनों ने मामले में मुआवजा और कार्रवाई की मांग की है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
दोनों घटनाएं अलग-अलग अस्पतालों में हुई, लेकिन दोनों के केंद्र में एक ही सवाल है कि क्या मरीजों को समय पर और सुरक्षित उपचार मिल पा रहा है? फिलहाल सदर अस्पताल और एमजीएम अस्पताल प्रबंधन ने जांच की बात कही है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि ये मौतें महज चिकित्सकीय जटिलताओं का परिणाम थीं या फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर चूक का परिणाम।
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