जिले में पिछले कुछ दिनों से जारी बिजली की अनियमित आपूर्ति और रोटेशन (कटौती) की समस्या को लेकर विद्युत विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। विद्युत अधीक्षण अभियंता ने बताया कि क्षेत्र में बिजली संकट का मुख्य कारण स्थानीय स्तर पर कोई गड़बड़ी न होकर मुख्य पावर सप्लाई प्लांट में तकनीकी खराबी होना है।
अधीक्षण अभियंता के अनुसार, केटीपीएस (कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन) में लगे पावर ट्रांसफार्मर के आईसीटी (ICT) में तकनीकी खराबी आ गई है। प्लांट का एक आईसीटी पहले से ही खराब था, जिसके बाद चालू स्थिति में काम कर रहा दूसरा आईसीटी भी तकनीकी समस्या का शिकार हो गया। इसके चलते पावर स्टेशन से मिलने वाली बिजली आपूर्ति में भारी कमी दर्ज की गई है।
क्षेत्र की कुल बिजली मांग लगभग 140 मेगावाट है, जिसके मुकाबले वर्तमान में कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन से महज 40 से 70 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध हो पा रही है। मांग और आपूर्ति के बीच आधे से अधिक के इस बड़े अंतर के कारण विभाग के पास रोटेशन (बारी-बारी से कटौती) के आधार पर बिजली आपूर्ति करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है।
अधीक्षण अभियंता ने स्पष्ट किया कि विभागीय स्तर पर बिजली वितरण नेटवर्क में कोई खराबी या कमी नहीं है। स्थानीय ढांचा पूरी तरह दुरुस्त है और जैसे ही पीछे से निर्बाध बिजली मिलेगी, आपूर्ति तत्काल सामान्य कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि डीवीसी (DVC) प्रबंधन और केटीपीएस की तकनीकी टीम समस्या के समाधान में लगातार जुटी हुई है। हालांकि, पूरी क्षमता के साथ आपूर्ति कब तक बहाल हो पाएगी, इसको लेकर स्थिति जल्द ही स्पष्ट की जाएगी।
विभाग ने उपभोक्ताओं से इस विषम परिस्थिति में सहयोग बनाए रखने की अपील की है। अधीक्षण अभियंता ने उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि जब तक तकनीकी समस्या दूर नहीं होती, तब तक बिजली का विवेकपूर्ण उपयोग करें और केवल आवश्यक उपकरण ही चलाएं, ताकि रोटेशन व्यवस्था के तहत सभी क्षेत्रों को समान रूप से बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
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