श्री कृष्ण जन्माष्टमी गृहस्थ जीवन वाले और वैष्णव संप्रदाय के लोग भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाएंगे। यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्म के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इसे कृष्णष्टमी या गोकुलाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन लोग उपवास रखने के साथ भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण को दही-दूध और मक्खन विशेष पसंद है। इसलिए इस दिन दही का पंचामृत बनाकर लोगों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। इसलिए श्री कृष्ण को प्यार से माखन चोर भी कहते हैं।
युगों पहले, मथुरा का राजा उग्रसेन था। उनके दो बच्चे थे। कंस नाम का एक बेटा और देवकी नाम की बेटी। देवकी एक नेकदिल वासुदेव की पत्नी थी, लेकिन कंस विपरीत बुद्धि का पुत्र था। जब वह बड़ा हुआ तो उसने अपने पिता राजा उग्रसेन को जेल में डाल दिया और खुद राजा बन गया।
कंसमामा को जब कृष्ण जन्म की सूचना मिली तो विचलित हो उठा और श्री कृष्ण को मारने के लिए। कई तरह के राक्षसों को भेजा लेकिन श्री कृष्ण तो भगवान विष्णु के अवतार थे। तो उन्हें कौन मार सकता है। श्री कृष्ण का जन्म ही। मानव जीवन का युद्धर करने के लिए अवतार हुआ हैं।
भगवान श्री कृष्ण बाल लीला से लेकर अपने किशोरा आवस्था में रासलीला हो। राधा से प्रेम” रुकमणी का हरण हो।” या शिशुपाल का वध” सुदामा का मित्रता हो।” या पांडवों का धर्म संकट के कारण द्रोपदी का चीरहरण का वस्त्र बढ़ाना और कौरओ के अत्याचार से बचाना।” हो। या महाभारत युद्ध हो।
भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से पूर्ण अवतार योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग के अंत में उन्होंने कंस के अत्याचारों से पृथ्वी को मुक्ति दिलाकर सनातन धर्म की पुनः स्थापना की थी। इसलिए भगवान योगेश्वर कृष्ण का जन्मोत्सव सनातन धर्मावलंबी हर्षोल्लास व पवित्रता के साथ पर्व रूप में मनाते हैं।
संयुक्त बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री कृष्ण बल्लभ सहाय जी के पौत्र एवं केबी सहाय जनकल्याण फाउंडेशन के संचालक श्री आशीष सहाय जी के ओर से देश के सभी श्री कृष्ण भक्तों को “श्री कृष्ण जन्माष्टमी” की बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं
(केबी सहाय)
(जनकल्याण फाउंडेशन)
(हजारीबाग)
Leave a comment