जामताड़ा में प्रशासन ने एक बाल विवाह को रुकवाया. मामला नारायणपुर प्रखंड के मदनाडीह पंचायत अंतर्गत तेतलियाटांड़ गांव का है. जहां रविवार यानी आज प्रस्तावित एक बाल विवाह प्रशासन ने रुकवाया और नाबालिग लड़की का भविष्य सुरक्षित किया. बता दें यह नारायणपुर प्रखंड में इस माह की दूसरी बड़ी कार्रवाई है. इससे पहले 7 अप्रैल को भी एक निकाह रुकवाया गया था.
परिजनों को अधिकारियों ने चेताया
अधिकारियों ने ग्रामीणों और परिजनों को चेतावनी दी कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर दो साल की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. न केवल माता-पिता, बल्कि शादी में शामिल होने वाले मेहमान और वर पक्ष भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं. इसके बाद परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार की और शादी रोकने पर सहमति जताई. अधिकारियों ने बताया कि कम उम्र में विवाह से लड़कियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ता है. प्रशासन ने अपील की कि बाल विवाह, बाल श्रम या बाल मजदूरी जैसे मामलों की सूचना तुरंत साझा करें.
साल 2025-2026 में 19 बाल विवाह के मामले
यह नारायणपुर प्रखंड में इस माह की दूसरी बड़ी कार्रवाई है. इससे पहले 7 अप्रैल को भी एक निकाह रुकवाया गया था। बाल संरक्षण अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2025 से 2026 के बीच जिले में अब तक कुल 19 बाल विवाह के मामले सामने आए हैं. वर्तमान में सरकार द्वारा प्रत्येक गांव और टोले में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म किया जा सके.
प्रशासन को मिली थी सूचना
बाल विवाह की सूचना मिलते ही प्रखंड विकास पदाधिकारीदेवराज गुप्ता के नेतृत्व में एक टीम मौके पर पहुंच गई. टीम में आंगनवाड़ी सुपरवाइजर प्रवेश कुमारी दास, कनीय अभियंता रवि उरांव और पंचायत सचिव दिलीप मंडल शामिल थे. अधिकारियों ने परिजनों को कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र में बेटी की शादी करना दंडनीय अपराध है.
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