वाराणसी। हिंदी साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में पूर्णचंद्र गुप्त और नरेंद्र मोहन के योगदान को याद करते हुए प्रो. अजित चतुर्वेदी ने कहा कि यदि ये दोनों व्यक्तित्व नहीं होते तो हिंदी जगत को बड़ी क्षति होती। वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दोनों के साहित्यिक और पत्रकारिता योगदान पर विस्तार से चर्चा की।
प्रो. अजित चतुर्वेदी ने कहा कि पूर्णचंद्र गुप्त और नरेंद्र मोहन ने हिंदी भाषा और साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यों ने हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के विकास को नई दिशा दी।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने दोनों साहित्यकारों और पत्रकारों के लेखन, विचारों और हिंदी के प्रति उनके योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि उनकी रचनात्मक दृष्टि और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि हिंदी के विकास में ऐसे व्यक्तित्वों की भूमिका को समझना और उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने हिंदी साहित्य और पत्रकारिता के इतिहास में उनके स्थान को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में साहित्य, पत्रकारिता और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान हिंदी भाषा के वर्तमान स्वरूप और भविष्य को लेकर भी चर्चा हुई।
वक्ताओं ने कहा कि हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर नए प्रयोग और बेहतर लेखन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में दोनों विभूतियों के योगदान को याद करते हुए उनके साहित्यिक और पत्रकारिता कार्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
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