उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (Fuel Surcharge) की वसूली को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन ने 14 महीने तक गलत फॉर्मूले का इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं से अधिभार वसूला। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य विद्युत नियामक आयोग ने इस पर नाराजगी जताई है।
जानकारी के अनुसार, अधिभार की गणना में निर्धारित नियमों और फॉर्मूले का सही तरीके से पालन नहीं किए जाने का मुद्दा आयोग के समक्ष उठा। इस पर आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से जवाब तलब करते हुए पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। यदि गणना में त्रुटि हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और प्रभावित उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मामले को लेकर आयोग ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही भविष्य में ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद उपभोक्ता संगठनों ने भी चिंता जताई है और पारदर्शी जांच के साथ दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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