स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के विधानसभा क्षेत्र के गृह जिले जामताड़ा का सरकारी सदर अस्पताल खुद ही इलाज की बाट जोह रहा है। देर रात हुई हल्की सी बारिश ने अस्पताल के बुनियादी ढांचे की पोल खोलकर रख दी। बारिश के कारण अस्पताल की बिल्डिंग का एक मुख्य हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे वहां भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में हड़कंप मच गया है। घटना के बाद से अस्पताल में डर का माहौल है। परिजनों का आरोप है कि सोमवार रात को हुए इस हादसे के बाद पूरा मंगलवार बीत गया, लेकिन प्रशासन ने मरम्मत की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। लोग इस डर के साये में रात गुजार रहे हैं कि कहीं पूरी बिल्डिंग न जमींदोज हो जाए।
अस्पताल की स्थिति पर उठते कुछ गंभीर सवाल
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
हल्की बारिश में पिलर का क्षतिग्रस्त होना निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है।
भवन में काफी समय से रिसाव (सिपेज) हो रहा था, जिसे नजरअंदाज किया गया।
आधिकारिक स्पष्टीकरण
इस मामले पर जामताड़ा सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. दिनेश प्रसाद ने सफाई देते हुए कहा कि बारिश की वजह से दीवार गिरी है, न कि मुख्य पिलर। उन्होंने दावा किया कि इससे बिल्डिंग की स्थिरता को कोई बड़ा खतरा नहीं है। उनके अनुसार, रिसाव की समस्या पहले से थी और जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा। विडंबना यह है कि यह वही क्षेत्र है जिसका प्रतिनिधित्व खुद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री करते हैं। विधानसभा अध्यक्ष का गृह जिला होने के बावजूद सदर अस्पताल की यह स्थिति सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है। 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने पर भी मरम्मत कार्य शुरू न होना स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
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