हजारीबाग : विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा द्वारा हूल दिवस मनाने की अनुमति नहीं देने के विरोध में आज दिनांक 1 जुलाई को एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय मुख्य द्वार के समीप पुतला दहन कर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया।
छात्र नेता अभिषेक राज ने बताया कि 25 जून को एनएसयूआई प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति महोदय से मुलाकात कर विश्वविद्यालय परिसर स्थित आर्यभट्ट हॉल में 30 जून को हूल दिवस मनाने की अनुमति मांगी थी। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया और अंततः कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी गई।
ऐसे में छात्र नेता अभिषेक राज ने कहा, “हूल दिवस झारखंड के आदिवासी इतिहास और संघर्ष का प्रतीक है। 30 जून 1855 को सिद्धो-कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में संथाल आदिवासियों ने अंग्रेजों और जमींदारों के शोषण के खिलाफ विद्रोह किया था, जिसे हूल विद्रोह के नाम से जाना जाता है। यह दिवस झारखंड की अस्मिता, संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है। झारखंड के किसी भी विश्वविद्यालय में अगर हूल दिवस जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दिवस को मनाने से रोका जाए, तो यह सिर्फ छात्र संगठन के साथ अन्याय नहीं, बल्कि इस धरती के आदिवासी-मूलवासी समाज के अपमान के समान है।”
अभिषेक राज ने कुलपति पर आदिवासी अस्मिता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा, “विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों की चेतना, इतिहास और संस्कृति से जोड़े रखने के बजाय प्रशासन उन्हें दबाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने मांग की कि भविष्य में विश्वविद्यालय परिसर में सभी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दिवसों को मनाने की अनुमति दी जाए और छात्र संगठनों को अपनी लोकतांत्रिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाए।” एनएसयूआई ने यह भी चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक आयोजनों में बार-बार बाधा उत्पन्न करता है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
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