हेमंत सोरेन की सरकार में आदिवासियों की बत से बत्तर स्थिति हुई है बबलू मुंडा।
पूर्व घोषित चार दिवसीय कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 11/7/2025 को गुमला जिला के लिटा टोली से पंखराज बाबा कार्तिक उरांव के जन्म स्थल से नमन करते हुए निशा भगत के अगुवाई में सिसई, भरनो, बेड़ो, कटहल मोड़, होते हुए दिनांक 13/7/2025 को रात्रि में रांची के आईटी आई बजरा पहुंचा। दिनांक 14/7/2025 को केन्द्रीय सरना समिति के अध्यक्ष श्री बबलू मुंडा के अगुवाई में विभिन्न आदिवासी, धार्मिक सामाजिक संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओ ने आईटी आई बजरा पहुंच कर गुमला से पदयात्रा कर रांची पहुंचने वाले सभी आदिवासी अगुवाओं का फुल माला एवं अंगवस्त्र देकर उनका गर्म जोशी के साथ स्वागत किया। पुनः केन्द्रीय सरना समिति के नेतृत्व में श्री बबलू मुंडा की अगुवाई में आई.टी.आई. बजरा से राजभवन मार्च किया गया और पेसा कानून अधिनियम 1996 को अविलम्ब लागु करने को लेकर महामहिम राज्यपाल महोदय को माँग पत्र सौपा गया। केन्द्रीय सरना समिति के अध्यक्ष श्री बबलू मुंडा ने कहा कि पेसा कानून अधिनियम 1996 को क्यों लागु करने की माँग की जा रही है क्योंकि इस पेसा कानून से आदिवासी समाज के एवं झारखण्ड के विभिन्न जिलों के पाहन,पईनभोरा,कोटवार, महतो, मानकी मुण्डा, बैगा आदि जैसे लोगों को मिलने वाले अधिकार संरक्षित हो सके। *श्री बबलू मुंडा ने कहा कि पेसा कानून अधिनियम 1996पेसा कानून पंचायत अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार अधिनियम 1996 भारत में अनुसूचित क्षेत्रों पांचवीं अनुसूची में रहने वाले आदिवासी समुदायों को स्वशासन और उनके प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार प्रदान करने के लिए बनाया गया है। यह कानून 24 दिसंबर 1996 को लागू हुआ और इसका उद्देश्य ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करना और जल जंगल जमीन जैसे संसाधनों पर उनके नियंत्रण को सुनिश्चित करना है। यह कानून संविधान के अनुच्छेद 243 M के तहत संसद द्वारा पारित किया गया और हेमंत सोरेन सरकार आदिवासियों की परंपरागत व्यस्था को नष्ट करने में लगी हैं। एक विशेष समुदाय को लाभ पहुंचाने के लिए, आदिवासियों की धर्म संस्कृति रीति रिवाज रुढ़िवादी प्रथा को खत्म करना चाहती है इसलिए हेमंत सोरेन सरकार झारखंड में पेसा कानून अधिनियम 1996 लागू नही कर रही हैं। *मुख्य पहान श्री जगलाल पहान ने कहा कि* पेसा अधिनियम 1996 में 23 प्रावधान और अधिनियम में कुल 17 धाराएँ हैं इसके अंतर्गत विभिन्न प्रावधान ग्राम सभाओं और पंचायतों को शक्तियाँ प्रदान करते हैं
1. ग्राम सभाओं को जल, जंगल, जमीन पर पूर्ण नियंत्रण।
2. लघु खनिजों के प्रबंधन और उपयोग का अधिकार।
3. भूमि अधिग्रहण में ग्राम सभा की सहमति।
4. स्थानीय विवादों को सुलझाने की शक्ति।
5. सामुदायिक संसाधनों (जैसे तालाब, वन) का प्रबंधन।
6. विकास योजनाओं की मंजूरी और निगरानी।
7. पारंपरिक प्रथाओं और संस्कृति की रक्षा।
8. शराब की बिक्री और खपत पर नियंत्रण।
9. स्थानीय संस्थाओं (स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र) पर निगरानी।
10. ग्राम सभा के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक विकास।
11. पंचायतों में आदिवासियों के लिए आरक्षण।
12. ग्राम सभा द्वारा बजट और योजनाओं की स्वीकृति।
13. गैर-आदिवासियों द्वारा आदिवासी भूमि के हस्तांतरण पर रोक।
14. पत्थलगढ़ी जैसे आंदोलनों के माध्यम से अधिकारों की रक्षा।
15. सामुदायिक एकता और सद्भाव को बढ़ावा देना।
16. स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे अपराधों का निपटारा।
17. ग्राम सभा को वित्तीय शक्तियाँ प्रदान करना।
18. परियोजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
19. आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण।
20. ग्राम सभा द्वारा स्थानीय बाजारों का प्रबंधन।
21. सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देना।
22. ग्राम सभा को कानूनी मान्यता और स्वायत्तता।
23. स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक प्रणाली को मजबूत करना। अशोक मुंडा ने कहा कि माननीय महामहिम राज्यपाल महोदय से आग्रह किया कि आदिवासी समाज के इन अधिकारों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र अतिषीघ्र पेसा कानून अधिनियम, 1996 को लागु करने की कृपा करें। इससे जनजाति क्षेत्र में स्वशासन एवं विकास ग्राम सभा को प्राप्त होगा प्राप्त होगा और में जनजाति क्षेत्र में अपनी पारंपरिक रीति रिवाज रीति रिवाज धर्म संस्कृति भाषा को विकास एवं विस्तार करने का अवसर प्राप्त होगा। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से केन्द्रीय सरना समिति अध्यक्ष श्री बबलू मुंडा, मुख्य पहान श्री जगलाल पहान, अशोक मुंडा महादेव टोप्पो,बिरसा, पहान निशा भगत, एंजेल लकड़ा, खुशबू, अमित मुंडा, मुकेश मुंडा, मुन्ना हेमरोम, अरूण पहान, विशाल मंडा, संतोष मुंडा, महादेव मुंडा, राकेश मुंडा, धन सिंह मुंडा, सुनील केरकेट्टा,समीर, मनीष मुंडा, राहुल मुंडा, पवन लोहार, धीरज केस्पोटा, अमित मुंडा, अशोक मुंडा, सूरज मिंज,अमर टोप्पो, शंभू टोप्पो, पूजा मुंडा, शशि टोप्पो, दीपक टोप्पो, नेहा हेंब्रम, कविता मुंडा, देवांती मुंडा, एवं अन्य सैकड़ो की संख्या में उपस्थित थे।
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