
हजारीबाग: अबुआ संथाल समाज भारत दिशोम की एकजुटता, सामाजिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर रविवार को हजारीबाग शहर स्थित बुढ़वा महादेव मंदिर के समीप प्रधान कैफेटेरिया बैंक्वेट हॉल में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए संथाल समाज के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठन के पदाधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने आदिवासी संथाल समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों, भाषा, संस्कृति और पारंपरिक वेशभूषा को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में समाज तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन अपनी मूल पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। समाज की एकता और संगठनात्मक मजबूती को समय की जरूरत बताते हुए लोगों से आपसी सहयोग और समन्वय बनाए रखने की अपील की गई।
अबुआ संथाल समाज भारत दिशोम के केंद्रीय महासचिव दसई किस्कू ने कहा कि संथाल समाज अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।
वहीं संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष बिनोद किस्कू ने कहा कि समाज की ताकत उसकी एकजुटता में निहित है। उन्होंने सभी लोगों से संगठन को मजबूत बनाने और सामाजिक हित के मुद्दों पर एक मंच पर आने की अपील की।
कार्यक्रम में हाल ही में हजारीबाग के यूरीमारी में आयोजित देश स्तरीय द्वितीय स्थापना दिवस सम्मेलन का भी उल्लेख किया गया, जिसमें 25 से अधिक राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर संथाल समाज की एकता और पहचान को बनाए रखने का संकल्प लिया था। कार्यक्रम का समापन समाज की उन्नति और संगठन की मजबूती के संकल्प के साथ हुआ।
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