साहिबगंज जिले के मंडरो प्रखंड स्थित कौड़ीखुटाना पंचायत की 42 वर्षीय विधवा महिला छंजी मुर्मू की जिंदगी आज भी सरकारी योजनाओं से कोसों दूर है। प्रधानमंत्री आवास योजना और अबुआ आवास योजना का उद्देश्य गरीबों को पक्का मकान प्रदान करना है, लेकिन छंजी मुर्मू वर्षों से बांस-करकट की झोपड़ी में रह रही हैं। पति की मौत के बाद से ही छंजी गरीबी से जूझ रही हैं। झोपड़ी की हालत इतनी दयनीय है कि बरसात के मौसम में पानी चारों तरफ से टपकता है। छंजी मुर्मू उत्क्रमित मध्य विद्यालय कौड़ीखुटाना में रसोइया का काम करके अपने बेटे का पालन-पोषण करती हैं। उनका जीवन मेहनत-मजदूरी और मामूली पेंशन के सहारे चल रहा है।
हालांकि छंजी के पास दो आधार कार्ड बने हैं, जिनमें अलग-अलग नाम दर्ज हैं, यही गड़बड़ी उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं दिला पाई। पंचायत स्तर पर भी लापरवाही साफ तौर पर दिखाई देती है। महिला कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और मुखिया के पास गईं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला। गांव के लोगों का कहना है कि जिनके पास पहले से पक्का घर है, उन्हें भी आवास योजना का लाभ मिल गया, जबकि असली हकदार छंजी मुर्मू आज भी छत को तरस रही हैं।
इस मामले को लेकर प्रखंड के बीडीओ मेघनाथ उरांव ने फोन पर कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और महिला को जल्द प्रधानमंत्री आवास योजना तथा विधवा पेंशन का लाभ दिलाने की कोशिश की जाएगी। वहीं, पंचायत के मुखिया अनीता हेंब्रम ने बताया कि छंजी मुर्मू का जिओ टेक कर दिया गया है, और सूची आने पर उनका नाम जोड़कर आवास योजना का लाभ दिया जाएगा।
पंचायत सचिवालय और मुखिया का घर महज कुछ 100 मीटर की दूरी पर छंजी मुर्मू की झोपड़ी खड़ी है। बावजूद इसके, योजनाओं का लाभ उनसे नहीं पहुंच पाया। सवाल यह उठता है कि जब पंचायत कार्यालय के पास रहने वाली एक विधवा महिला की स्थिति इतनी दयनीय है, तो दूर-दराज के गांवों में रहने वाले गरीबों की हालत कैसी होगी। बरसात के मौसम में जब झोपड़ी से पानी टपकता है, तो छंजी मुर्मू के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है कि वह अपने सामान को बचाएं या फिर खाने का इंतजाम करें।
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