झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां तैनात 108 एम्बुलेंस पिछले एक माह से खराब बताई जा रही है। हालात ऐसे हैं कि इमरजेंसी में वाहन को 15–20 मिनट तक धक्का मारकर स्टार्ट करना पड़ता है। रविवार सुबह इसी कथित लापरवाही के कारण एक सड़क दुर्घटना में घायल महिला की मौत हो गई। हादसे में कार सवार एक महिला समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। स्थानीय लोगों ने बरलंगा थाना पुलिस को सूचना दी। गांव के युवक रंजीत कुमार ने डायल 108 पर फोन किया, जिसके बाद बरलंगा थाने के पास खड़ी एम्बुलेंस को हर बार की तरह पांच–सात लोगों ने धक्का देकर किसी तरह चालू किया।
एम्बुलेंस लगभग 15–20 मिनट की मशक्कत के बाद स्टार्ट हुई और करीब चार किलोमीटर दूर सिल्ली मोड़ स्थित घटनास्थल तक पहुंची। तब तक लगभग 40 मिनट बीत चुके थे और घायल सड़क पर तड़पते रहे। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को गोला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के लिए एम्बुलेंस में चढ़ाया गया। लेकिन रास्ते में एम्बुलेंस फिर बंद हो गई और दोबारा धक्का मारकर चालू करना पड़ा। इलाज के लिए ले जाते समय घायल महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
विपक्ष का हमला
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना को लेकर सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों की बदहाल स्थिति, वेंटिलेटर और दवाइयों की कमी, जर्जर सड़कों और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण लोग रोज जान गंवा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के अपने गांव की स्थिति दयनीय है और स्वास्थ्य मंत्री की संवेदनहीनता ने ग्रामीणों को ‘खाट-एम्बुलेंस’ के भरोसे छोड़ दिया है। मरांडी ने सवाल उठाया कि क्या एम्बुलेंस का नियमित मेंटेनेंस सुनिश्चित करना इतना कठिन है? क्या ग्रामीण और आदिवासी केवल सत्ता तक पहुंचने का माध्यम बनकर रह गए हैं? उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
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