रिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक पतरातु

हजारीबाग/रामगढ़- केंद्र सरकार द्वारा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के माध्यम से खनिजों पर उपकर (Cess) लगाने के राज्यों के अधिकार को खत्म करने के फैसले के विरोध में आज कांग्रेस पार्टी ने हजारीबाग और रामगढ़ में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव, बड़कागांव की पूर्व विधायक सह कांग्रेस की फायरब्रांड नेता अंबा प्रसाद मुख्य रूप से शामिल हुईं और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला।
हजारीबाग समाहरणालय और रामगढ़ जिला मुख्यालय के समक्ष सैकड़ों कांग्रेस नेताओं व समर्पित कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर केंद्र के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
धरना को संबोधित करते हुए अंबा प्रसाद ने इस फैसले को झारखंड की छाती और जन-अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया।
उन्होंने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को स्पष्ट अधिकार दिया था कि वे अपने खनिजों पर उपकर लगाकर स्थानीय विकास सुनिश्चित कर सकें। लेकिन केंद्र सरकार झारखंड के कोयले, लोहे और अभ्रक की कमाई को हड़पना चाहती है। केंद्र ने पहले से ही झारखंड के हक का 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया रोक रखा है। अब खनिज सेस पर रोक लगाकर केंद्र सरकार यहाँ के 3.5 करोड़ आदिवासी-मूलवासियों को गंभीर आर्थिक संकट और आर्थिक शोषण का शिकार बना रही है, जिससे राज्य की कई जनकल्याणकारी योजनाएं बंद होने के कगार पर पहुँच सकती हैं।
अंबा प्रसाद ने केंद्र की कॉर्पोरेट-समर्थक नीतियों और मंशा पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा: कि “आखिर किसके फायदे और किसकी ‘संरक्षित एकाधिकार’ (Protected Monopoly) स्थापित करने के लिए राज्य का खनिज सेस (Cess) बंद किया गया है? झारखंड आज विस्थापन, प्रदूषण और बेरोजगारी का दंश झेल रहा है, लेकिन केंद्र सरकार अडानी, अंबानी, NTPC, CCL और BCCL जैसी बड़ी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए झारखंड के संसाधनों पर गिद्ध दृष्टि जमाए बैठी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मात्र 25 वर्ष पुराने झारखंड राज्य का तेजी से विकास खनिजों से मिलने वाले राजस्व और सेस पर ही निर्भर है, केंद्र सरकार की इस झारखंड-विरोधी नीति और पूंजीपतियों के पक्ष में किए जा रहे आर्थिक अन्याय के खिलाफ यह लड़ाई सड़क से सदन तक निरंतर जारी रहेगी। झारखंड का खनिज, झारखंड का अधिकार इसे किसी भी कीमत पर छीनने नहीं दिया जाएगा।
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