हजारीबाग: प्रसिद्ध कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य द्वारा महिलाओं को लेकर की गई अमर्यादित टिप्पणी से देशभर में आक्रोश का माहौल है। धार्मिक मंच से महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग न केवल उनके संस्कारों पर प्रश्नचिन्ह लगाता है, बल्कि समाज की सोच को भी आहत करता है। इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए नव झारखंड फाउंडेशन के केंद्रीय अध्यक्ष किशोरी राणा ने कहा कि अनिरुद्धाचार्य की टिप्पणी उनकी ओछी मानसिकता का परिचायक है। उन्होंने कहा, यह पहली बार नहीं है जब अनिरुद्धाचार्य ने महिलाओं के बारे में विवादित बयान दिया है। उनका ऐसा रवैया बताता है कि उन्हें ना तो महिलाओं के सम्मान की समझ है और ना ही सार्वजनिक मंच की गरिमा का कोई ख्याल। श्री राणा ने आगे कहा कि ऐसे कथावाचकों पर सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि धार्मिक मंचों का दुरुपयोग बंद हो और भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की अभद्र भाषा बोलने से पहले सौ बार सोचे। उन्होंने इसे महिलाओं की गरिमा और आत्मसम्मान पर सीधा हमला बताया। देशभर में सोशल मीडिया पर भी अनिरुद्धाचार्य के बयान की तीखी आलोचना हो रही है। महिला संगठनों ने भी इसके विरोध में आवाज़ बुलंद की है और सरकार से कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है और क्या ऐसे कथावाचकों पर कोई ठोस कार्यवाही होती है।
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