हजारीबाग

26 सप्ताह में जन्मा 650 ग्राम का नवजात, 84 दिन बाद मौत को दी मात

Share
Share
Khabar365news

आरोग्यम हॉस्पिटल में चिकित्सा विज्ञान और मानवीय सेवा का अनुकरणीय उदाहरण

यह सफलता हमारी मेडिकल टीम और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण का परिणाम है। गंभीर नवजातों को बेहतर जीवन देना हमारा संकल्प है : हर्ष अजमेरा

कम वजन के नवजात को बचाना बड़ी चुनौती थी, जिसे टीम वर्क से संभव किया गया। यह हजारीबाग के लिए गर्व की बात है : जया सिंह

हजारीबाग

चिकित्सा विज्ञान, आधुनिक तकनीक और डॉक्टरों की निष्ठा का एक उल्लेखनीय उदाहरण हजारीबाग शहर के प्रतिष्ठित अस्पतालों में से एक आरोग्यम हॉस्पिटल में सामने आया है। 26 सप्ताह में जन्मा मात्र 650 ग्राम वजन का अत्यंत नाजुक नवजात, जिसकी जीवन की उम्मीदें जन्म के साथ ही क्षीण हो गई थीं, 84 दिनों तक चले गहन इलाज के बाद स्वस्थ होकर अपनी माँ की गोद में घर लौट गया। यह सफलता न केवल एक परिवार के लिए राहत और खुशी की खबर है, बल्कि जिले के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार नवजात का जन्म एक अन्य अस्पताल में समय से पहले हुआ था। जन्म के तुरंत बाद उसकी हालत गंभीर हो गई। फेफड़े पूरी तरह विकसित न होने के कारण बच्चे को सांस लेने में भारी परेशानी हो रही थी। स्थिति लगातार बिगड़ती देख परिजनों ने तत्काल बच्चे को हजारीबाग के आरोग्यम हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहाँ उसे नियोनेटल आईसीयू में रखा गया।
पीडियाट्रिक्स एवं नियोनेटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. हीरालाल राम, नियोनेटल एवं चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. प्रकाश चंद्र तथा चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. सुरभि कुमारी की टीम ने बच्चे के इलाज की कमान संभाली। चिकित्सकों के अनुसार बच्चे के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं थे, जिसके कारण उसे वेंटिलेटर और सीपीएपी सपोर्ट पर रखा गया। इलाज के दौरान कई बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता पड़ी। 84 दिनों तक लगातार दिन-रात की निगरानी, सटीक चिकित्सकीय निर्णय और नर्सिंग स्टाफ की अथक सेवा के चलते बच्चे की स्थिति में निरंतर सुधार होता गया। इलाज के दौरान प्रीमैच्योरिटी से जुड़ी सभी जटिलताओं पर सफलतापूर्वक काबू पा लिया गया। डिस्चार्ज के समय बच्चे का वजन बढ़कर 1620 ग्राम (1 किलो 620 ग्राम) हो गया, जो इस लंबी और चुनौतीपूर्ण चिकित्सा यात्रा की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बच्चे की माँ गीता देवी ने भावुक होते हुए कहा कि जब उन्होंने बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया था, तब उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी। आरोग्यम हॉस्पिटल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने उनके बच्चे को अपने परिवार के सदस्य की तरह संभाला और आज उसी समर्पण का परिणाम है कि उनका बच्चा स्वस्थ है। इस खुशी के अवसर पर आरोग्यम हॉस्पिटल में डिस्चार्ज के दिन केक कटिंग का आयोजन किया गया। केक बच्चे की माँ ने काटा, जिसमें अस्पताल के चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस नवजीवन और चिकित्सा सफलता का उत्सव मनाया। आरोग्यम हॉस्पिटल के निदेशक हर्ष अजमेरा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता पूरी मेडिकल और नर्सिंग टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य अत्याधुनिक सुविधाओं के माध्यम से गंभीर से गंभीर नवजातों को भी जीवन की नई उम्मीद देना है। वहीं अस्पताल के प्रशासक जया सिंह ने कहा कि यह घटना साबित करती है कि अब हजारीबाग जैसे शहर में भी अत्यंत गंभीर और कम वजन के नवजातों का सफल इलाज संभव है, जो जिले के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक नई उपलब्धि है।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Categories

Calender

January 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  







Related Articles
हजारीबाग

हजारीबाग में सनसनीखेज हत्या कांड का खुलासा — SIT की बड़ी कार्रवाई, 8 आरोपी गिरफ्तार, खून से सना हथियार बरामद!

Khabar365newsहजारीबाग। जिले के लोहसिंघना थाना क्षेत्र अंतर्गत इंद्रपुरी चौक के पास हुई...

हजारीबाग

पूर्व सदर विधानसभा प्रत्याशी मुन्ना सिंह ने जंगली हाथी हमलों के पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, हर संभव मदद का दिया भरोसा

Khabar365newsहाथियों की आवाजाही पर नियंत्रण, निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और प्रभावित क्षेत्रों...