राष्ट्रीय सचिव सह बंगाल प्रभारी
पूर्व विधायक बड़कागांव ने कहा
रिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक पतरातु
यह बजट ‘कॉरिडोर बजट’ है। पूरे बजट में केवल कॉरिडोर ही दिखाई दे रहे हैं। इसमें आम आदमी के रोज़गार और औद्योगिकीकरण (Industrialization) को लेकर कोई बात नहीं की गई है। 3 नए AIIMS खोलने का प्रस्ताव तो है, लेकिन दिल्ली को छोड़कर बाकी सभी AIIMS की हालत किसी ज़िला अस्पताल (Sadar Hospital) जैसी ही है।
माननीय केंद्रीय वित्त मंत्री महोदया जिस राज्य की साड़ी पहनकर बजट पेश करती हैं, बजट में भी थोड़ा-बहुत वही राज्य दिखाई देता है।
महोदया ने अब तक 8 अलग-अलग प्रांतों की साड़ियाँ पहनकर 8 बजट पेश किए हैं; जिस साल वे जिस प्रांत की साड़ी पहनती हैं, उसी प्रांत को विकास फंड दिया जाता है। इस पूरे बजट में झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे पूर्वी क्षेत्रों के लिए कुछ भी लाभदायक नहीं है। आम जनता के रोज़मर्रा के सामान पर कोई छूट नहीं दी गई है।
इसके विपरीत, टैक्स चोरों की सज़ा माफ कर उन्हें ज़ुर्माने (Fine) में तब्दील कर दिया गया है। इनडायरेक्ट टैक्स और जीएसटी (GST) पर कोई राहत नहीं है। वैश्विक बाज़ार में रुपये की कीमत गिर गई है और अब 1 डॉलर की कीमत 91 रुपये हो गई है। इन्फ्लेशन रेट (मुद्रास्फीति) को कम करने के लिए बैंकिंग, इकोनॉमिक और इंडस्ट्रियल सेक्टर हेतु ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है जिससे मॉनेटरी इन्फ्लेशन कम हो और रुपये की वैल्यू बढ़े।
बैंकिंग सेक्टर पर ऑब्ज़र्वर नियुक्त कर दिए गए हैं। सरकार द्वारा आरबीआई (RBI) सिक्योरिटीज़ को खर्च किए जाने से रोकने का भी कोई प्रस्ताव नहीं है।
यदि आप इस बजट का विश्लेषण इस साल की CAG की एनुअल रिपोर्ट के साथ करेंगे, तो आप पाएँगे कि रिपोर्ट कुछ और है और बजट कुछ और। झारखंड का 1.5 लाख करोड़ रुपया, जो जीएसटी रिफंड के रूप में मिलना चाहिए था (और जो कई अन्य राज्यों का भी बकाया है), उसे वापस करने की कोई बात बजट में नहीं कही गई है।
यदि बजट प्रस्तावना में राज्यों को देय जीएसटी राशि का न तो उल्लेख हो और न ही कोई प्रस्ताव, तो यह ‘फेडरल स्ट्रक्चर’ (संघीय ढाँचे) के नियमों की अवहेलना है। राज्यों का बजट भी केंद्र के बजट पर निर्भर करता है। केंद्र सरकार को फेडरल स्ट्रक्चर में बजट पेश करते समय केवल भाजपा शासित प्रदेश ही दिखते हैं, गैर-भाजपा शासित राज्य नहीं।
Leave a comment