पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने निजी विद्यालयों की मान्यता को लेकर जमीन की बाध्यता समाप्त करने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर कहा है कि देर आए दुरुस्त आए। पासवा चीख चीख कर कह रही थी आरटीई कानून में कहीं पर भी निजी विद्यालयों की मान्यता के लिए जमीन की बाध्यता नहीं दी गई थी। अब झारखंड सरकार भी केंद्र के प्रस्ताव के आधार पर जल्द से जल्द कानून बनाकर राज्य के निजी विद्यालयों के लिए जमीन की बाध्यता पूरी तरह समाप्त करे। उन्होंने कहा कि केंद्र के प्रस्ताव से अब तो कानून बनाना भी सरल हो गया है।
दूबे ने कहा कि पासवा प्रारंभ से ही निजी विद्यालयों के लिए जमीन की बाध्यता समाप्त करने के लिए झारखंड के विभिन्न मंचों सहित राष्ट्रीय मंच तक आवाज उठाती रही है और वर्तमान स्थिति यह है कि झारखंड के निजी विद्यालयों को पासवा द्वारा दायर रिट याचिका पर ही उच्च न्यायालय ने स्टे आर्डर दे कर तात्कालिक राहत भी प्रदान की है। उन्होंने निजी विद्यालयों के लिए जमीन की बाध्यता समाप्त करने के प्रस्ताव के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि वास्तव में यह मुद्दा बहुत संवेदनशील है क्योंकि जमीन की बाध्यता जारी रखने पर झारखंड सहित संपूर्ण राष्ट्र के अनगिनत निजी विद्यालय बंद हो जाते जिससे छोटे बच्चों को प्राप्त होने वाला देश की गुणात्मक शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाती।
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