हजारीबाग से एक बड़ी लापरवाही की तस्वीर सामने आई है। जहां जनता की मूलभूत सुविधाओं के लिए खरीदी गई करोड़ों रुपये की नगर निगम की गाड़ियां पिछले दो–तीन सालों से बेकार खड़ी हैं… लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी टूटी नहीं है। मामला हजारीबाग नगर निगम का है, जहां सफाई, जलापूर्ति और अन्य नगर सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई महंगी गाड़ियां खरीदी गई थीं। लेकिन खरीदे जाने के बाद से ही ये वाहन उपयोग में आने के बजाय निगम परिसर में जस के तस खड़े हैं और धीरे–धीरे कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि इन गाड़ियों के लिए ड्राइवर और मैकेनिक भी नियुक्त किए जा चुके हैं… उन्हें नियमित वेतन भी मिल रहा है…इतना ही नहीं, डीजल और सर्विसिंग के नाम पर भी खर्च दिखाए जाने की चर्चा है… मगर जमीनी हकीकत में गाड़ियां आज भी सड़क पर नहीं उतर पाई हैं। चुनावी माहौल में जहां नगर निगम चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं… वहीं करोड़ों की इन बेकार पड़ी गाड़ियों का मुद्दा किसी के मेनिफेस्टो में जगह नहीं पा सका है। न मेयर पद के उम्मीदवार… न वार्ड प्रत्याशी… और न ही जनप्रतिनिधियों ने अब तक इस मामले पर खुलकर कोई बयान दिया है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जनता के पैसे की बर्बादी पर सबकी चुप्पी बनी रहेगी? चुनाव से पहले मतदाताओं को चाहिए कि जब भी प्रत्याशी वोट मांगने आएं… उनसे इस मुद्दे पर साफ जवाब जरूर मांगें… कि जीत के बाद इन गाड़ियों का क्या होगा और जिम्मेदारी कौन तय करेगा।
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