आस्था, परंपरा और दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग के बीच देवघर का बाबाधाम नगरी आज से रंगों में सराबोर होने जा रहा है। पावन नगरी में तीन दिवसीय होली महोत्सव की शुरुआत सोमवार शाम चार बजे होगी। परंपरा के अनुसार, सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा द्वारा बाबा वैद्यनाथ पर गुलाल अर्पित कर होली का विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। तिथि गणना के विशेष संयोग के कारण इस वर्ष दो से चार मार्च तक होली का उत्सव मनाया जाएगा, जबकि पांच मार्च को बासी होली की परंपरा निभाई जाएगी। दिनभर जलार्पण के बाद अपराह्न साढ़े तीन बजे मंदिर का पट बंद होगा और ठीक चार बजे पुनः खोला जाएगा। इसके बाद बाबा पर गुलाल चढ़ाकर “सुखी होली” की शुरुआत होगी। इसी क्रम में भितरखंड स्थित राधा-कृष्ण मंदिर से भगवान की डोली ढोल-नगाड़ों के साथ आजाद चौक स्थित दोल मंच तक निकाली जाएगी।
शोभायात्रा के दौरान विभिन्न चौक-चौराहों पर मालपुआ का भोग लगाया जाएगा और दौल मंच पर राधा-कृष्ण को झुलाने की परंपरा निभाई जाएगी। हरिहर मिलन तक पूरी रात मंदिर का पट खुला रहेगा। मंगलवार तड़के पांच बजकर ग्यारह मिनट पर दोल मंच में विधि-विधान से होलिका दहन होगा। इसके बाद राधा-कृष्ण की डोली बाबा मंदिर पहुंचेगी, जहां सुबह छह बजे गर्भगृह में हरिहर मिलन का अलौकिक दृश्य साकार होगा। जयकारों और गुलाल के बीच यह अद्भुत परंपरा संपन्न होगी। श्रृंगार पूजन के बाद मंदिर पुनः आम श्रद्धालुओं के लिए खुलेगा और सुबह दस बजे से जलार्पण प्रारंभ होगा।
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