रिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक पतरातु
हेसला पंचायत भवन में विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोर्चा के बैठक की गई जिसकी अध्यक्षता प्रदीप महतो ने किया। जिसमें जमीन अधिग्रहण की दोहरी नीति का विरोध किया गया कहा गया कि जिस उद्देश्य के लिए जमीन लिया गया इस उद्देश्य पर जमीन पर काम होना चाहिए। अन्यथा जमीन रैयत को वापस करें।
पूरे पतरातू क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन किया जा रहा है। 2013 कानून के तहत पीटीपीएस के तमाम जमीनों को रैयतो को वापस करना चाहिए। लेकिन सरकार अन्य कंपनियों को जमीन देने में लगी हुई है। जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। आज हेसला पंचायत को खाली करा कर जियाडा को देने की बात कहीं जा रही है।
जो 2013 कानून का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन है। किसी भी सूरत में क्वार्टर को खाली नहीं करने दिया जाएगा। हम सभी लोग इसका पुरजोर विरोध करेंगे। साथ में पतरातू क्षेत्र में चल रहे तमाम फैक्ट्री में भी स्थानीय विस्थापित प्रभावितों को रोजगार से नहीं जोड़ा जा रहा है और पीभीयूएनएल में बाहरी मजदूरों को बेरोकटोक बहाली किया जा रहा है इसका मोर्चा पुरजोर विरोध करती है और समय रहते 25 गांव के विस्थापित प्रभावितों को रोजगार से नहीं छोड़ा जाता है तो बहुत जल्द आंदोलन करने की बात कही गई है यहां के विस्थापित प्रभावित दर-दर के ठोकरे खा रहे हैं पर यहां के मैनेजमेंट उस पर कोई ध्यान नहीं है इसलिए लोगों में आक्रोश है और यह आक्रोश बहुत जल्द दिखेगा।
इस बैठक में मुख्य रूप से पार्वती देवी,तापस मान, ममता कुमारी, जीरू देवी,देवंती देवी, सुरविला देवी, अनीता देवी, बिरंजा देवी,संतू सोरेन,तारा देवी, गुड़िया कुमारी,सुजीत कुमार, प्रदीप साहू,शंकर बिन्द,आदि सैकड़ो लोग उपस्थित हुए।
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