गोड्डा के मेहरमा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नैना देवी, एक साधारण ग्रामीण महिला, अपने परिवार की भलाई के लिए बंध्याकरण कराने अस्पताल पहुंची थीं. लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह फैसला उनकी जिंदगी का आखिरी कदम साबित होगा. यहां इलाज के नाम पर ऐसी लापरवाही बरती गई कि एक मां की जान चली गई और उनके पीछे तीन मासूम बच्चे छूट गए. परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों से गंभीर गलती हो गई, जिससे उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई. उनका दावा है कि सर्जरी के दौरान मल-मूत्र से जुड़ी नस कट गई, जिसके बाद नैना देवी जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही. हालत बिगड़ने पर उन्हें पहले मेहरमा के एक निजी क्लिनिक ले जाया गया, लेकिन वहां भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ. इसके बाद उन्हें भागलपुर के एक निजी अस्पताल रेफर किया गया. जब वहां भी हालत नहीं सुधरी, तो डॉक्टरों ने उन्हें देवघर स्थित एम्स भेज दिया. दुर्भाग्यवश, वहां भी वह जिंदगी की जंग हार गईं.
नैना देवी अपने पीछे तीन छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गईं, जिन्हें अभी यह भी समझ नहीं है कि उनकी मां अब कभी लौटकर नहीं आएगी. घर में सन्नाटा पसरा है, चीख-पुकार है, और मासूम बच्चों की आंखों में ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब किसी के पास नहीं. चौंकाने वाली बात यह है कि परिजनों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी कई मरीज इसी तरह की लापरवाही का शिकार हो चुके हैं, और कुछ अब भी देवघर एम्स में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. सिविल सर्जन डॉ. सुभाष शर्मा के अनुसार, महिला का ऑपरेशन 24 फरवरी को हुआ था और 24 घंटे बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया. उन्होंने इस घटना को दुखद बताते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है.
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