मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के महत्वपूर्ण ‘चांडिल–टाटा रेल सेक्शन’ पर यात्री ट्रेनों के घंटों देरी से चलने पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (X) पर पोस्ट किया। उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से इस रूट पर यात्री ट्रेनों की स्थिति “अस्वीकार्य” हो चुकी है।
CM हेमंत सोरेन ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने मालगाड़ियों के निर्बाध संचालन और यात्री ट्रेनों की अनदेखी पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने रेलवे की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां एक ओर मालगाड़ियों की आवाजाही निर्बाध रूप से जारी है, वहीं आम यात्रियों, श्रमिकों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को घंटों तक ट्रेनों का इंतजार करना पड़ रहा है। सीएम ने इसे केवल परिचालन की खामी नहीं, बल्कि रेलवे की प्राथमिकताओं का दोष बताते हुए कहा कि आम जनता की गरिमा और सुविधा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। अपने पोस्ट में उन्होंने यह भी पूछा कि क्या रेलवे के लिए झारखंड के नागरिकों के समय का महत्व देश की अर्थव्यवस्था के लिए किए जाने वाले माल परिवहन से कम है? मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उसी ट्रैक पर मालगाड़ियां बिना किसी बाधा के दौड़ रही हैं, जबकि यात्री ट्रेनों को किनारे लगा दिया जाता है। यह स्थिति राज्य के दैनिक यात्रियों के लिए अब असहनीय और अपमानजनक हो चुकी है।
तीन प्रमुख मांगे
रेल मंत्री को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं जिनमें
• चांडिल-टाटा सेक्शन में यात्री ट्रेनों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना
• लंबित इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समय पर पूरा करना
• ट्रेन लेट होने की समस्या का तत्काल समाधान करना शामिल है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे लेकर जोर देते हुए कहा कि रेलवे को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा ताकि झारखंड के आम नागरिकों के समय और उनकी सुविधा की रक्षा की जा सके।
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