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पहाड़ और नदियों को बचाने की मुहिम तेज, जमशेदपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 22 मई से 

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Khabar365news

जमशेदपुर में 22 और 23 मई को पर्वत और नदियों के संरक्षण पर केंद्रित राष्ट्रीय स्तर का दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जायेगा। यह आयोजन शहर के मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल में होगा, जहां देशभर से पर्यावरणविद, जल विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता एक मंच पर जुटेंगे। सम्मेलन का आयोजन तरुण भारत संघ और युगांतर भारती के नेतृत्व में किया जा रहा है। इनके साथ आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, जल बिरादरी, नेचर फाउंडेशन, स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट और मिशन वाई जैसी संस्थाएं भी साझेदार हैं। कार्यक्रम 22 मई को सुबह 9 बजे शुरू होकर शाम 6 बजे तक चलेगा, जबकि 23 मई को सुबह 9 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक सत्र आयोजित होंगे।

आयोजन के लिए 14 विभाग गठित

सम्मेलन के सुचारू संचालन के लिए आयोजन समिति ने 14 अलग-अलग विभागों का गठन किया है। इनमें कार्यक्रम, निबंधन, आवास, भोजन, यातायात, साज-सज्जा, आमंत्रण, प्रचार-प्रसार, मीडिया समन्वय, अतिथि सत्कार, पेयजल एवं स्वच्छता, कार्यालय, सांस्कृतिक और फोटो-वीडियोग्राफी विभाग शामिल हैं। समिति के संरक्षक के रूप में विधायक सरयू राय और राजेंद्र सिंह (जलपुरुष) को जिम्मेदारी दी गयी है। वहीं, संयोजक पर्यावरणविद दिनेश मिश्र, सह संयोजक अंशुल शरण और अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह बनाए गए हैं। समिति में विभिन्न क्षेत्रों के कई विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

कानून की जरूरत पर जोर

वहीं सरयू राय ने कहा कि देश में अब तक न तो पहाड़ों और न ही नदियों के संरक्षण के लिए समर्पित कोई ठोस कानून बन पाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन और सिंचाई विभाग के मौजूदा नियम इन प्राकृतिक संसाधनों की व्यापक सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञ अपने सुझाव देंगे और एक ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा, जिसे केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा। उनका कहना था कि यदि ठोस कानून बनता है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा संरक्षण कवच साबित होगा। सरयू राय ने स्वर्णरेखा नदी की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि नदी के पानी में ऑक्सीजन की कमी से जलीय जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने 2006 के उस दौर को भी याद किया, जब नदी के पानी के नमूने लेने पर लोगों ने मजाक उड़ाया था, लेकिन आज वही चिंता गंभीर रूप ले चुकी है।

पहाड़ हैं, लेकिन दिखते नहीं

पर्यावरणविद दिनेश मिश्र ने कहा कि विकास और खनन के दबाव में पहाड़ों का अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि तथ्यों के आधार पर एक मजबूत दस्तावेज तैयार कर सरकार तक पहुंचाया जाएगा, जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होगा। इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पहाड़ों और नदियों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति और कानून की दिशा में पहल करना है। विशेषज्ञों की राय और अनुभवों के आधार पर एक ऐसा प्रारूप तैयार करने की कोशिश होगी, जो नीति निर्माण में उपयोगी साबित हो सके।

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