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​झारखंड के 25 हजार से अधिक राशन डीलरों का फूटा गुस्सा: ‘मांगें पूरी नहीं हुईं तो ठप करेंगे अनाज वितरण, शुरू होगा आर-पार का आंदोलन’

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​झारखंड के फेयर प्राइस शॉप डीलर्स एसोसिएशन (ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन की राज्य इकाई) ने सूबे के मुखिया, खाद्य आपूर्ति मंत्री और मुख्य सचिव को अपनी मांगों का एक अल्टीमेटम पत्र सौंपते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। राज्य भर के डीलरों ने आज एक प्रदेश सम्मेलन में एकजुट होकर साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने अगले महीने तक उनकी लंबित समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो वे अपने अधिकारों और रोजी-रोटी के लिए चरणबद्ध तरीके से धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य हो जाएंगे। एसोसिएशन ने सरकार से बकाया कमीशन राशि के तत्काल भुगतान और उनकी ज्वलंत समस्याओं के त्वरित निदान की पुरजोर मांग की है।

​डीलरों की सबसे प्रमुख मांग बढ़ती महंगाई को देखते हुए प्रतिमाह 10,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने और खाद्यान्न वितरण पर प्रति किलो 3 रुपये कमीशन तय करने की है, ताकि वे दुकान का किराया, बिजली बिल, सहायक की मजदूरी और अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मानजनक तरीके से कर सकें। इसके साथ ही, डीलरों ने मांग की है कि राज्य के 25,439 डीलरों द्वारा JSFSS और NFSA योजनाओं के तहत वर्तमान एवं पूर्व में वितरित की गई सामग्रियों का उचित मूल्यांकन किया जाए। संघ ने पूर्व और वर्तमान विभागीय मंत्रियों द्वारा घोषित योजनाओं, जैसे— कुपोषण से बचाव के लिए सोयाबड़ी, सरसों तेल और मुख्यमंत्री दाल योजना को नियमित रूप से हर महीने लागू करने की भी मांग उठाई है。

​इसके अलावा, एसोसिएशन ने जमशेदपुर से माननीय विभागीय मंत्री द्वारा घोषित ‘अबुआ चिकित्सा योजना’ का लाभ डीलर परिवारों को देने के लिए अविलम्ब आधिकारिक निर्देश जारी करने का आग्रह किया है ताकि उन्हें चिकित्सा सुविधा मिल सके। राशन वितरण व्यवस्था में आ रही तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों को रेखांकित करते हुए डीलरों ने कहा कि राज्य में अनियमित खाद्यान्न आपूर्ति और सर्वर व नेटवर्क की खराबी के कारण ‘स्मार्ट पीडीएस’ का वितरण प्रतिशत प्रभावित हो रहा है, जिससे कई लाभुक अनाज से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने सभी योजनाओं का खाद्यान्न एक साथ, सही समय पर और शुद्ध मात्रा में निर्गत करने तथा एनआईसी (NIC) में एक समर्पित शिकायत प्रकोष्ठ (सेल) स्थापित करने की मांग की है。

​संगठन ने सरकारी स्तर पर प्रशासनिक विसंगतियों को दूर करने पर भी जोर दिया है। डीलरों का आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा दी गई इलेक्ट्रॉनिक तराजू (EVM) का अनुज्ञप्ति कार्य विभाग द्वारा नहीं कराए जाने के कारण माप-तौल विभाग जिलों में डीलरों को अनावश्यक रूप से परेशान कर रहा है। साथ ही, केंद्र सरकार के निर्देशानुसार ऑनलाइन वितरण व्यवस्था में भंडार व वितरण पंजी जैसी कागजी प्रक्रियाओं से मुक्ति का ‘पेपरलेस’ आदेश अभी तक राज्य में जारी नहीं हुआ है। इतना ही नहीं, झारखंड कंट्रोल एक्ट 2024 के तहत लाइसेंस ट्रांसफर (अनुज्ञप्ति स्थानांतरण) के आदेश का जिला आपूर्ति पदाधिकारियों द्वारा पालन न किए जाने से सैकड़ों डीलर प्रभावित हैं। अंत में, डीलरों ने धोती-साड़ी-लुंगी योजना को भी ‘वन स्टेट वन डिस्ट्रीब्यूशन’ की तर्ज पर लागू करने की मांग की है ताकि कोई भी गरीब इस लाभ से वंचित न रहे। यह निर्णय प्रदेश अध्यक्ष सुरेश प्रसाद और प्रदेश महासचिव संजय कुण्डू के नेतृत्व में बुलाई गई महाबैठक में सर्वसम्मति से लिया गया है। 

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