रिपोर्ट- सुमित कुमार पाठक पतरातु
पतरातू स्टीम कॉलोनी के सबसे सम्मानित और प्रसिद्ध प्राइवेट ट्यूटर्स में से एक अजित सर का कल निधन हो गया। क्लास 12th तक साइंस और मैथ पढ़ाने वाले सर का नाम सुनते ही पूरे इलाके में एक भरोसा जग जाता था।
उनका घर सिर्फ एक कोचिंग सेंटर नहीं था, वो सैकड़ों बच्चों के लिए दूसरा घर था।
ब्लैकबोर्ड पर फॉर्मूले लिखते लिखते वो जिंदगी के फॉर्मूले भी सिखा देते थे। न्यूटन के नियम हों या त्रिकोणमिति के सवाल, उनके पढ़ाने का तरीका ऐसा था कि सबसे कमजोर बच्चा भी कह उठता था “सर, अब समझ आ गया”।
स्टीम कॉलोनी की गलियों में सुबह होते ही किताबों का बोझ लिए बच्चों की भीड़ ही बता देती थी कि सर का बैच शुरू होने वाला है।
रिजल्ट के दिनों में उनके घर मिठाई का डिब्बा लेकर आने वाले छात्रों की लाइन लग जाती थी। उनके लिए हर बच्चे की सफलता अपनी सफलता थी।
आज वो ब्लैकबोर्ड सूना है। पर उनके पढ़ाए हजारों छात्र डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर बनकर पूरे देश में फैले हैं। हर एक छात्र के दिमाग में उनका कोई न कोई डायलॉग गूंज रहा होगा: “बेटा, कॉन्सेप्ट क्लियर रखो, नंबर अपने आप आएंगे”।
पतरातू स्टीम कॉलोनी का वो बरगद का पेड़ चला गया जिसकी छांव में कई पीढ़ियों ने शिक्षा पाई, आज इनका अंतिम संस्कार दामोदर नदी घाट में किया गया, उपस्थित लोगों ने नम आंखों से शिक्षक को अंतिम विदाई दी
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