रिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक पतरातु
पतरातू प्रखंड के ग्राम गेगदा में विस्थापित- प्रभावित संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारी की एक बैठक एवं प्रेस कॉन्फ्रेंस सम्पन्न हुई।
विस्थापित-प्रभावितों के दर्द को ब्यान करते हुए कहा गया कि NTPC का PVUNL(भारत देश का महारत्न कम्पनी) के रुप में यहां पदार्पण हुआ तो बर्षो से लम्बित हमारी समस्याओं के समाधान का उम्मीद कर हमलोगों ने आगे बढ़कर स्वागत किया।। लेकिन इसके उलट पूर्व PTPS की पुनरावृत्ति करते हुए ही PVUNL प्रबंधन द्वारा विस्थापित-प्रभावितों को ठगा और छला जा रहा है। इस तरह धीरे-धीरे NTPC
(PVUNL)अपने वास्तविक रुप *दूसरा ईस्ट इण्डिया कम्पनी का रुप में आ गया। फुट डालो, राज करो PVUNL का प्रमुख पॉलिसी बन चुका है।
एक ओर रैयत विस्थापित- प्रभावितों के साथ छल-धोखा विश्वासघात व दरकिनार करते हुए मोटी रकम वसूली कर लगातार बाहरी आउटसोर्सीग एजेंसियों के द्वारा बाहरियों की बहाली जारी है। कई तरह का हथकण्डा और षड्यंत्र रचते हुए ऐश डाइक का घेरा बंदी कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर PVUNL के नव निर्मित / निर्माणाधीन पावर प्लांट में कार्यरत PVUNL का मैन पावर सप्लाई एजेंसी हो या PVUNL का EPC कॉन्ट्रैक्टर BHEL के एजेंसियों के तहत काम कर रहे लेबर, ज्यादातर लोगों को न्यूनतम मजदूरी नहीं दिया जा रहा है । इसमें PVUNL के सीईओ , भेल के अधिकारी एवं केंद्रीय लेबर आयुक्त की मिली भगत से यह नेक्सस चल रहा है। ज्ञात हो कि किसी भी कॉन्टैक्टर का लेबर लाइसेंस के फॉर्म 3 पर सीईओ का हस्ताक्षर होता है तभी उसका लेबर लाइसेंस बन पाता है । क्लिम्स गेट में मजदूरों के हाजरी पंचिंग को एजेंसियों के द्वारा PVUNL के अधिकारी के सहमति से बदल दिया जाता है। मजदूरों से 12 से 14 घंटा काम लेकर उन्हें न्यूनतम मजदूरी तो नहीं दिया जाता है,साथ में उनके कार्य दिवस को कम दिखाकर पीएफ भी कम जमा कर दिया जाता है । मैनिपुलेटेड मंथली पेमेंट शिट को ही है PVUNL HR विभाग अप्रूव्ड कर देता है। ठेकेदारों से उपकृत होकर मजदूरों के शोषण के लिए खुली छूट दे दी जाती है। इस रैकेट को उजागर करते हुए इसके विरोध में शीघ्र PMO के साथ केंद्रीय श्रम मंत्री एवं झारखंड के मुख्यमंत्री जी से अविलंब हस्तक्षेप कर न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने एवं मजदूरों के शोषण के निमित्त PVUNL के सीईओ पर श्रम कानून के अनुसार मुकदमा दायर करने कड़ा से कड़ा कार्रवाई करने,विस्थापित- प्रभावित ग्रामीणों एवं मजदूरों को इंसाफ़ के लिए लिखित गुहार लगाया जाएगा। सूत्रों से ऐसी सूचना मिली है कि PVUNL में कार्य कर रहे ठेकेदारों को श्रम विभाग के अधिकारियों के द्वारा व्हाट्सएप कॉल करके उपकृत करने का दबाव बनाया जाता है । इसके साथ-साथ PVUNL के द्वारा वर्ष में प्रत्येक पर्व त्यौहार में श्रम विभाग के अधिकारियों को उपहार पहुंचाया जाता है। वर्तमान सीईओ के कार्यकाल में मजदूरों के साथ घोर अमानवीय व्यवहार हो रहा है। हर जगह सुरक्षा मानकों का लगातार अनदेखा करने के कारण सबसे ज्यादा मेजर और माइनर एक्सीडेंट हुआ है। इन दुर्घटनाओं को भी प्रबंधन द्वारा छिपाने का प्रयास किया जाता है। *इसका एक ताजा उदाहरण भेल के ठेकेदार कनवर में कार्यरत मजदूर सरोज कुमार जो गंभीर रूप से घायल है और उसका पैर में कट गया है उसको सीईओ के अनुमति से चुप चाप बिना PVUNL हॉस्पिटल के सूचना के रामगढ़ किसी अस्पताल में भर्ती कराया गया । विस्थापित मोर्चा के विरोध से उसे अच्छे चिकित्सा के लिए रामप्यारी हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया है । मजदूरों का ना सेफ्टी का ध्यान है और ना ही उसे न्यूनतम मजदूरी देना है इस प्रकार हर स्तर पर शोषण। विस्थापित प्रभावितों के साथ सभी मजदूर त्रस्त हैं। कहा गया कि मोर्चा के द्वारा इस दूसरे ईस्ट इंडिया कम्पनी के हर षड्यंत्र और शोषण के पर्दाफाश कर प्रत्येक स्तर पर आवाज उठाया जाएगा। साथ ही साथ वर्तमान सीईओ के कार्यकाल में हुए सारे दुर्घटनाओं का विवरण केंद्रीय सुरक्षा अधिकारी एनटीपीसी एवं चीफ फैक्टरी इंस्पेक्टर को अवगत कराकर जांच करने की मांग की जाएगी।
आज के बैठक में मुख्य रूप से कुमेल उरांव ,राजाराम प्रसाद, प्रिय नाथ मुखर्जी ,मो० कयूम अंसारी थे।
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