बांग्लादेश में हिंसा और अशांति के माहौल के बीच हिंदू समुदाय को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ताजा मामला नरसिंगदी जिले का है, जहां किराना स्टोर में काम करने वाले हिंदू युवक मोनी चक्रवर्ती की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि सोमवार रात करीब 10 बजे उन पर हमला हुआ था और गंभीर चोटों के कारण बाद में उनकी मौत हो गई। बीते 24 घंटों में यह दूसरी ऐसी घटना है, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल गहराता जा रहा है। इससे पहले 3 जनवरी को 50 वर्षीय खोकन चंद्र दास पर बेरहमी से हमला किया गया था। हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से वार किया और बाद में आग लगा दी, जिससे उनकी मौत हो गई। वहीं 24 दिसंबर को राजबाड़ी जिले के पांग्शा उपजिला में कथित उगाही के आरोप में अमृत मंडल नामक एक अन्य हिंदू व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डाला गया था।
18 दिसंबर को मैमनसिंह शहर में 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने हत्या कर दी थी। आरोप है कि पहले उनकी पिटाई की गई और बाद में शव को आग के हवाले कर दिया गया। इसी क्रम में 23 दिसंबर को चटगांव के बाहरी इलाके राउजान में अज्ञात लोगों ने कतर में काम करने वाले प्रवासी मजदूर शुख शिल और अनिल शिल के घर में आग लगा दी थी, हालांकि इस घटना में परिवार के सदस्य सुरक्षित बच निकले। इसी बीच जसोर जिले के मोनिरामपुर इलाके में राणा प्रताप वैरागी नामक एक हिंदू युवक की गोली मारकर हत्या किए जाने की खबर भी सामने आई है। बीते 18 दिनों में यह पांचवीं हत्या बताई जा रही है। इस मामले में अब तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और हत्या के कारणों का भी खुलासा नहीं हो सका है।
इससे पहले गुरुवार को भी एक हिंदू कारोबारी चंद्र दास पर जानलेवा हमला किया गया था। दवा की दुकान और मोबाइल बैंकिंग का व्यवसाय करने वाले चंद्र दास जब दुकान बंद कर ऑटो रिक्शा से घर लौट रहे थे, तभी हमलावरों ने वाहन रोककर उन पर हमला किया। आरोप है कि उनकी पिटाई की गई, धारदार हथियारों से वार किए गए और बाद में पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की गई। जान बचाने के लिए चंद्र दास सड़क किनारे एक तालाब में कूद गए, जिसके बाद लोगों के शोर मचाने पर हमलावर फरार हो गए। बताया जा रहा है कि हादी नामक युवक की हत्या के बाद से कट्टरपंथी तत्वों द्वारा हिंदू समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। लगातार हो रही इन घटनाओं से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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