हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कुसुम्बा गांव में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। रामनवमी के दौरान लापता हुई एक मासूम बच्ची का शव अगले दिन सुबह बांस झाड़ी के पास बरामद हुआ, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। तकनीकी साक्ष्य और गहन अनुसंधान के आधार पर पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड की परतें खोल दीं, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया।
जांच में सामने आया कि मृतका की मां लंबे समय से अपने बेटे की शारीरिक और मानसिक परेशानियों के समाधान के लिए गांव की एक महिला, शांति देवी उर्फ ‘भगतिन’ के संपर्क में थी। अंधविश्वास के जाल में फंसकर उसे यह यकीन दिलाया गया कि समस्याओं के समाधान के लिए एक कुंवारी बच्ची की बलि देनी होगी।
रामनवमी के दिन, योजनाबद्ध तरीके से मासूम बच्ची को पूजा के बहाने भगतिन के घर ले जाया गया। वहां तंत्र-मंत्र की आड़ में बेहद क्रूरता के साथ बच्ची की हत्या कर दी गई। इस अमानवीय कृत्य में बच्ची की मां और एक अन्य आरोपी भीम राम जिसे बच्ची की मां का प्रेमी बताया जा रहा है उसकी भी संलिप्तता सामने आई है।
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों—भीम राम, रशेमी देवी (मृतका की मां) और शांति देवी उर्फ भगतिन—को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपी कुसुम्बा गांव के ही निवासी हैं।
इस पूरे मामले में हजारीबाग पुलिस की सक्रियता और पेशेवर जांच की सराहना की जा रही है। पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में गठित टीम ने बेहद कम समय में इस जघन्य अपराध का खुलासा कर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया, जो कानून व्यवस्था के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह घटना समाज में व्याप्त अंधविश्वास की खतरनाक सच्चाई को उजागर करती है, जहां मासूम जिंदगी को भी बेरहमी से कुर्बान कर दिया जाता है। जरूरत है जागरूकता और सख्त कार्रवाई की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
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