हजारीबाग। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026 को लेकर झारखंड नवनिर्माण फाउंडेशन की केंद्रीय अध्यक्ष एवं प्रख्यात समाजसेवी किशोरी राणा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस बजट को झारखंड के लिए निराशा, भ्रम और खोखले आश्वासनों का दस्तावेज़ बताया। उनका कहना है कि यह बजट झारखंड को राहत देने के बजाय केवल दिखावटी सपनों की झोली थमा गया है।
किशोरी राणा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि बजट की स्थिति बिल्कुल उस कहावत जैसी है—
“एक आंख में काजल, दूसरी में सुरमा”,
जहाँ शब्दों का श्रृंगार तो भरपूर है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई पूरी तरह नदारद है।
उन्होंने कहा कि झारखंड आज बेरोज़गारी, पलायन और युवाओं के टूटते सपनों के सबसे गंभीर दौर से गुजर रहा है। खनिज संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद राज्य का युवा रोज़गार के लिए महानगरों और दूसरे राज्यों में भटकने को मजबूर है। अब तक सैकड़ों प्रवासी मजदूरों की असमय मौत हो चुकी है, जबकि कई युवा विदेशों में फँसकर अमानवीय परिस्थितियों का शिकार बने—जिन्हें बाद में सरकारी हस्तक्षेप से वापस लाया गया। इसके बावजूद बजट में झारखंड की इस पीड़ा की कोई ठोस झलक नहीं दिखती।
उन्होंने बजट में झारखंड के नाम पर की गई घोषणाओं को अस्पष्ट और भ्रम पैदा करने वाला बताया। नगर आर्थिक क्षेत्र योजना के लिए घोषित ₹5000 करोड़, पूर्वोदय पहल, परिवहन और खनन से जुड़ी योजनाएँ कागज़ों में भले ही आकर्षक दिखें, लेकिन इससे आज का बेरोज़गार युवा न तो नौकरी पाएगा और न ही पलायन रुक पाएगा। उनके अनुसार, सरकार ने आज के संकट के बजाय केवल कल के वादों पर भरोसा करने को कहा है।
किशोरी राणा ने रांची स्थित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के उन्नयन को सकारात्मक पहल बताया, लेकिन सवाल उठाया कि झारखंड को अब तक एम्स, मेगा इंडस्ट्रियल पैकेज और विशेष रोज़गार मिशन जैसी प्रत्यक्ष और निर्णायक विकास योजनाओं से क्यों वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा कि संसाधनों से भरपूर राज्य को बार-बार हाशिये पर रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह बजट झारखंड के आज का नहीं, बल्कि सिर्फ अनिश्चित भविष्य का बजट है—जिसमें वर्तमान की पीड़ा के लिए कोई दवा नहीं, केवल आश्वासन की गोली दी गई है।
अंत में किशोरी राणा ने केंद्र सरकार से ज़ोरदार मांग की कि झारखंड के लिए विशेष आर्थिक पैकेज, स्थायी रोज़गार सृजन योजना और पलायन रोकने की ठोस नीति तुरंत लागू की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अब भी झारखंड के युवाओं की अनदेखी जारी रखी, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा—और इसकी पूरी ज़िम्मेदारी स्वयं केंद्र सरकार की होगी।
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