आधी रोटी, आधी धूल” में कट रही ज़िंदगी
पाकुड़ ब्यूरो जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट
महेशपुर (पाकुड़)। महेशपुर प्रखंड के जियापानी गांव में क्रेशर से उड़ने वाली धूल अब केवल परेशानी नहीं, बल्कि ग्रामीणों के जीवन के लिए खतरा बनती जा रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोगों को अपने ही घरों में सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। चारों ओर उड़ती धूल ने गांव को मानो धुएं की चादर में ढक दिया है।
घर-आंगन से लेकर रसोई तक धूल ही धूल
ग्रामीणों का कहना है कि क्रेशर से निकलने वाली धूल सीधे घरों के अंदर पहुंच रही है। छत, आंगन, बर्तन और रसोई सब कुछ धूल से पटा रहता है।
एक ग्रामीण ने दर्द बयां करते हुए कहा—
“हम जो खाते हैं, उसमें आधी रोटी होती है और आधी धूल… यही हमारी रोज़ की सच्चाई है।”
पीने का पानी भी दूषित, बीमारियों ने डाला डेरा
धूल के कारण पीने का पानी भी सुरक्षित नहीं रह गया है। गांव में खांसी, सांस फूलना, आंखों में जलन, एलर्जी जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।
बिना डस्ट कंट्रोल के चल रहे क्रेशर, प्रशासन पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई क्रेशर बिना किसी प्रभावी डस्ट कंट्रोल सिस्टम के संचालित हो रहे हैं। न तो पानी का नियमित छिड़काव किया जा रहा है और न ही पर्यावरणीय मानकों का पालन। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से समस्या और गंभीर होती जा रही है।
ग्रामीणों की मांग — तुरंत हो कार्रवाई
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
क्रेशर क्षेत्रों में धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी छिड़काव अनिवार्य किया जाए
पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले क्रेशरों पर सख्त कार्रवाई हो
धूल से बीमार ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य जांच व उपचार शिविर लगाया जाए
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