झारखंड छात्र संघ ने राज्य सरकार से सिविल सेवा और कक्षपाल नियुक्ति परीक्षाओं में अधिकतम उम्र सीमा में छूट देने की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष एस अली ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित मांग पत्र जारी कर कहा कि वर्तमान आयु निर्धारण से बड़ी संख्या में झारखंडी अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होने से वंचित हो सकते हैं।
एस अली ने कहा कि बीते 25 वर्षों में जेपीएससी द्वारा केवल 8 बार सिविल सेवा परीक्षा आयोजित की गई है। उनका आरोप है कि पिछली संयुक्त असैनिक नियुक्ति परीक्षा (विज्ञापन संख्या-2024) में अधिकतम आयु सीमा की गणना 1 अगस्त 2017 के आधार पर की गई थी, जबकि नए विज्ञापन संख्या-2026 में इसे 1 अगस्त 2026 मान लिया गया है।
संगठन का कहना है कि आयु सीमा निर्धारण में इस बदलाव से हजारों उम्मीदवार पात्रता से बाहर हो जाएंगे। इसे अभ्यर्थियों के साथ अन्याय बताया गया है।
कक्षपाल नियुक्ति को लेकर भी छात्र संघ ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस पद के लिए अंतिम विज्ञापन वर्ष 2015 में जारी हुआ था, ऐसे में लंबे अंतराल के बाद निकली भर्ती में अभ्यर्थियों को कम से कम 5 वर्ष की आयु छूट दी जानी चाहिए।
छात्र संघ ने मांग की है कि सिविल सेवा (नियमित व बैकलॉग) विज्ञापन संख्या-2026 में संशोधन करते हुए अधिकतम आयु की गणना 1 अगस्त 2018 से की जाए। संगठन ने कहा कि सरकार को झारखंडी युवाओं की परिस्थितियों को देखते हुए संवेदनशील निर्णय लेना चाहिए।
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