रिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक पतरातु
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रखंड सचिव मनोज कुमार महतो ने बयान जारी कर कहा है कि वित्त मंत्री के द्वारा जो आम बजट2026 पेश किया गया है वह केवल लोक लुभावन घोषणाएं है, यह बजट दक्षिण भारत के राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बजट में लोक लुभावना घोषणाएं की गई है।
झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार किया गया, वित्त मंत्री को पूर्व में पेश किए गए बजट के बारे में भी बताना चाहिए था की पिछली घोषणाओं को हमने कितना पूरा किया, केवल लोक लुभावन घोषणाओं से जनता को कुछ मिलने वाला नहीं है।आज कई बरसों से किसानों के आमदनी दोगुना करने के नाम पर किसानों को बेवकूफ बनाया जा रहा है, देश के हजारों किसान आत्महत्या कर रहे हैं,
किसानों को फसल बीमा का भुगतान भी नहीं हो रहा है, फसल बीमा का लाभ बड़े-बड़े पूंजी पतियों को हो रहा है, बेरोजगारों के लिए रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है, देश में आज 30 करोड़ बेरोजगार हैं शिक्षित बेरोजगार भी आत्महत्या करने के कगार पर हैं, संसद के अंदर 95% करोड़पति लोग संसद की शोभा बढ़ा रहे हैं ।आज सरकार ने शिक्षा का बजट टोटल बजट का 4.5% था उसे मोदी सरकार ने घटकर 2.5% कर दिया है उच्च शिक्षा का बजट टोटल बजट का 2.5% था उससे 0.9% कर दिया है इस तरह रक्षा का बजट टोटल बजट का 17% था अब 13,% कर दिया है वही दूसरी तरफ चार लेबर कोड के बारे में कोई चर्चा नहीं है ना ही मजदूरों की न्यूनतम वेतन ,सामाजिक सुरक्षा मजदूरों का आर्थिक लाभ कैसे बड़े इस पर कोई चर्चा नहीं की गई।
आज देश के 80% लोग 5 किलो अनाज पर जीने के लिए मजबूर हो रहे हैं, ऐसे में वित्त मंत्री जी का घोषणाएं कितनी कारगर होगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा, जब से भारतीय जनता पार्टी केंद्र की सत्ता में आई है देश के किसान मजदूर छात्र नौजवान ठगे महसूस कर रहे हैं दक्षिण भारत के विधानसभा के चुनाव में किसान मजदूर छात्र नौजवान एवं विकास से वंचित लोग भारी शिकस्त देंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और झारखंड के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो बिहार और झारखंड के विशेष राज्य दर्जा देने को लेकर सस्ती लोकप्रियता के लिए आंदोलन चलाए थे, झारखंड में भी आजसु के बैनर तले विशेष राज्य की दर्जा के लिए बहरागोड़ा से लेकर बरही तक आंदोलन किए थे, राज्य को अब तक नहीं मिला विशेष राज्य का दर्जा।
वित्त मंत्री सीतारमण जी के केवल घोषणाओं का बजट है। यह बजट पूंजी पतियों के लाभकारी बजट है झारखंड के लोग भी ठगे महसूस कर रहे हैं बजट में किसनो, मजदूरों छात्रों एवं नौजवानों के लिए कुछ नहीं है किसानों के खाद बीज कीटनाशक एवं खेती के संसाधनों में सब्सिडी मिलनी चाहिए थे जो बजट में नहीं है। वहीं दूसरी तरफ आदिवासी, दलित एवं अल्पसंख्यक के अधिकारों पर लगातार हनन हो रहे हैं कुल मिलाकर यह बजट पूर्व की बजट की तरह केवल घोषणाओं की बजट है इससे जनता ठगे महसूस कर रही है।
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