पाकुड़ से जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट
पाकुड़। रेल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद खतरनाक साजिश का खुलासा हुआ है। आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने जानबूझकर रेल पटरी पर बाधा डालकर ट्रेन दुर्घटना कराने की योजना बनाई थी।
सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता से समय रहते यह साजिश नाकाम हो गई और एक बड़ा हादसा टल गया।
मामला तिलभीटा और कोटालपोखर रेलवे स्टेशन के बीच का है, जहां किलोमीटर संख्या 156/04 के पास करीब डेढ़ मीटर लंबा कटा हुआ रेल का टुकड़ा पटरी पर रख दिया गया था। जांच में सामने आया कि यह हरकत 10 जनवरी की रात कुमारपुर इलाके में लेवल क्रॉसिंग गेट संख्या 41/सी के समीप की गई थी। इस स्थान से रोजाना कई यात्री और मालगाड़ियां गुजरती हैं, ऐसे में हादसे की आशंका बेहद गंभीर थी।
घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) पोस्ट पाकुड़ में मामला दर्ज किया गया। रेलवे अधिनियम की कई धाराओं के तहत कांड संख्या 18/2026 दर्ज करते हुए जांच शुरू की गई। वहीं, जीआरपी थाना बरहरवा ने भी बीएनएस की गंभीर धाराओं और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत अलग से प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई को आगे बढ़ाया।
गुप्त सूचना के आधार पर 14 जनवरी को आरपीएफ, जीआरपी पाकुड़ और आरपीएफ सीआईबी बर्दवान की संयुक्त टीम ने कुमारपुर क्षेत्र में छापेमारी की। इस दौरान यार मोहम्मद शेख उर्फ जोकर और राहुल शेख को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में दोनों ने न केवल रेल पटरी पर बाधा डालने की बात कबूल की, बल्कि तिलभीटा स्टेशन क्षेत्र में मालगाड़ी से कोयला चोरी की एक अन्य घटना में भी अपनी भूमिका स्वीकार की।
जांच के दौरान मुख्य आरोपी यार मोहम्मद उर्फ जोकर ने बताया कि उसके कुछ साथियों की पहले गिरफ्तारी हो चुकी थी, जिससे वह काफी नाराज था। इसी नाराजगी में उसने रेलवे प्रशासन और आरपीएफ को सबक सिखाने के इरादे से इस खतरनाक साजिश को अंजाम देने की योजना बनाई। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने कुमारपुर गांव में छापेमारी कर तीसरे आरोपी नजमी शेख को भी गिरफ्तार कर लिया।
शुरुआत में उसने पुलिस को भ्रमित करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ के बाद उसने भी अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली।
तीनों आरोपियों को 14 जनवरी 2026 को न्यायालय में पेश किया गया है। रेलवे और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते रेल पटरी से बाधा नहीं हटाई जाती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था, जिसमें कई निर्दोष यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती थी।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रेलवे सुरक्षा में छोटी सी लापरवाही भी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है, लेकिन समय पर की गई कार्रवाई से जान-माल की रक्षा संभव है।
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