पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोट की चपेट में आए एक दंतैल जंगली हाथी का इलाज बुधवार से शुरू कर दिया गया है। चिकित्सकों के अनुसार, आईईडी विस्फोट का प्रभाव बेहद गंभीर है। हाथी के एक पैर की सभी अंगुलियां ब्लास्ट में उड़ गयी हैं, जिसके कारण वह पैर जमीन पर नहीं रख पा रहा है। ऐसे में उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।झारखंड और ओडिशा के पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम वन विभाग की निगरानी में उसका उपचार कर रही है। घायल हाथी को कोलबोंगा क्षेत्र के सासंगदा-लेबरागढ़ा नाला के पास ट्रैक किया गया है, जहां चिकित्सक उसे दवाइयां दे रहे हैं। हाथी को एंटीबायोटिक, दर्दनाशक, और सूजन कम करने वाली दवाएं लौकी और तरबूज में मिलाकर खिलाई जा रही हैं ताकि उपचार प्रभावी हो सके।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
वन विभाग की टीम हाथी को सुरक्षित स्थान पर लाने की कोशिश में जुटी है, ताकि बेहतर और समुचित इलाज किया जा सके। साथ ही इलाके में लगातार निगरानी रखी जा रही है।
ऐसे सामने आया मामला
ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले कोलबोंगा जंगल में मछली पकड़ने के दौरान घायल हाथी को देखा था। इसके बाद वन विभाग को सूचना दी गयी। आशंका जतायी जा रही है कि चिरिया ओपी थाना क्षेत्र के पोंगा जंक्शन के पास हुए आईईडी विस्फोट में ही यह हाथी घायल हुआ।
वन्यजीव भी बन रहे निशाना
इस घटना ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बिछाए जा रहे आईईडी के खतरों को उजागर किया है। इसका असर केवल सुरक्षा बलों तक सीमित नहीं, बल्कि वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। वन विभाग हाथी को बचाने के हरसंभव प्रयास में जुटा है।
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