पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में जारी राजनीतिक तनाव के बीच उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम से एक बड़ी वारदात सामने आई है। बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी और निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। जानकारी के मुताबिक यह हमला 6 मई की रात मध्यमग्राम के दोहरिया इलाके में हुआ। हमलावरों ने कथित तौर पर चंद्रनाथ रथ की गाड़ी का पीछा किया और सुनसान इलाके में उन्हें घेरकर फायरिंग शुरू कर दी। रिपोर्ट्स के अनुसार बाइक सवार बदमाशों ने बेहद करीब से कई राउंड गोलियां चलाईं। इस हमले में चंद्रनाथ रथ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद बुद्धदेव बेरा गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन पर उठे सवाल
घटना के बाद राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चुनाव के बाद राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है और कई इलाकों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है। इसके बावजूद इतनी बड़ी वारदात होना विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि राज्य में राजनीतिक हिंसा को रोकने में प्रशासन विफल साबित हो रहा है। वहीं पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल से कई सबूत जुटाए गए हैं। घटना के बाद शुभेंदु अधिकारी ने अपने करीबी सहयोगी की हत्या को पूर्व नियोजित हत्या बताया है। उन्होंने दावा किया कि हमलावर कई दिनों से रेकी कर रहे थे और पूरी साजिश के तहत वारदात को अंजाम दिया गया। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने भी इस घटना की निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। राजनीतिक गलियारों में इस हत्या को चुनाव बाद बढ़ती हिंसा और सत्ता संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है।
बंगाल में बढ़ा तनाव, जांच जारी
चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद उत्तर 24 परगना समेत कई इलाकों में तनाव बढ़ गया है। पुलिस ने जांच तेज करते हुए संदिग्ध वाहनों और हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में फर्जी नंबर प्लेट वाले वाहन के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। इस घटना ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा और राजनीतिक सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। राज्य की जनता अब यह सवाल उठा रही है कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद कब तक हिंसा में बदलते रहेंगे।
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