नई दिल्ली: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। रियायती एलपीजी सिलेंडर के सालाना कोटे में कटौती करते हुए इसे घटाकर 4 सिलेंडर कर दिया गया है। इस फैसले का असर देशभर के करोड़ों उज्ज्वला उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
जानकारी के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को वर्षभर में सीमित संख्या में ही रियायती दर पर एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध होंगे। निर्धारित कोटे से अधिक सिलेंडर लेने पर उपभोक्ताओं को सामान्य बाजार मूल्य का भुगतान करना पड़ सकता है।
इस बदलाव के बाद ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कई परिवार घरेलू जरूरतों के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं, ऐसे में रियायती सिलेंडरों की संख्या कम होने से उनके मासिक खर्च पर असर पड़ सकता है।
वहीं, सरकार की ओर से इस संबंध में जारी दिशा-निर्देशों और व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं के बीच चर्चा तेज हो गई है। लाभार्थी नई व्यवस्था की पूरी जानकारी हासिल करने में जुटे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी उपभोग, सब्सिडी प्रबंधन और सरकारी खर्च के संतुलन को ध्यान में रखते हुए ऐसे निर्णय लिए जाते हैं। हालांकि, इसका सीधा प्रभाव उज्ज्वला योजना से जुड़े परिवारों पर पड़ सकता है।
इस फैसले के बाद लाभार्थियों के बीच चिंता बढ़ गई है और वे सरकार से राहत देने की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और स्पष्टता सामने आने की उम्मीद है।
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