पाकुड़। चंडालमारा–पाखरिया सड़क चौड़ीकरण परियोजना में भूमि अधिग्रहण और लंबित मुआवज़े का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मुद्दे को उठाते हुए राज्य सरकार पर प्रभावित रैयतों की अनदेखी का आरोप लगाया है।

सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में मरांडी ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में केवल 10 डिसमिल भूमि अधिग्रहण का उल्लेख है, जबकि अंचल अधिकारी की जांच रिपोर्ट में लगभग 70 डिसमिल भूमि सड़क निर्माण में उपयोग किए जाने की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में अधिक भूमि उपयोग की बात सामने आ चुकी है, तो प्रभावित किसानों को उसका वैधानिक मुआवज़ा अब तक क्यों नहीं मिला।

उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद 14 सितंबर 2018 को जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, पाकुड़ ने पथ प्रमंडल को पत्र भेजकर मामले की पुनः जांच कराने और आवश्यक होने पर अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद कई वर्ष बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका।

मरांडी ने यह भी कहा कि प्रभावित रैयत गणेश मंडल ने पिछले छह महीनों में उपायुक्त, पाकुड़ को तीन बार आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और लंबित मुआवज़े के भुगतान की मांग की, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई।

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि प्रभावित रैयतों को शीघ्र उनका वैधानिक मुआवज़ा दिलाया जाए। साथ ही उन्होंने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं और मुआवज़ा भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की।

उल्लेखनीय है कि चंडालमारा–पाखरिया सड़क निर्माण परियोजना में रिकॉर्ड से अधिक भूमि उपयोग और मुआवज़े के भुगतान में कथित विसंगतियों का मामला पहले भी विभागीय जांच में सामने आ चुका है। विपक्ष द्वारा फिर से मुद्दा उठाए जाने के बाद अब प्रशासन और सरकार की भूमिका पर निगाहें टिकी हैं।

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