हजारीबाग। झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के बाद छात्रों से लेकर सफल अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के बीच चिंता और बहस तेज हो गई है। एक ओर आंदोलनकारी छात्र इसे अपनी बड़ी जीत बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परीक्षा में सफलता हासिल कर सरकारी नौकरी पा चुके अभ्यर्थियों के सामने अब अपने भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
इस पूरे मामले पर नव झारखंड फाउंडेशन के केंद्रीय अध्यक्ष किशोरी राणा ने सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उसकी सजा उन गरीब और मेहनती युवाओं को क्यों मिले, जिन्होंने वर्षों तक संघर्ष कर अपनी योग्यता के दम पर सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा, “हर किसी ने सीट नहीं खरीदी है और न ही हर किसी ने सेटिंग के सहारे नौकरी हासिल की है। बहुत से अभ्यर्थियों ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और संघर्ष के बल पर मुकाम हासिल किया है।”
किशोरी राणा ने कहा कि हजारों अभ्यर्थियों ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की। कई युवाओं ने दूसरी नौकरियां तक छोड़कर JSSC-CGL से मिली सरकारी नौकरी को अपने भविष्य का आधार बनाया। ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द होना उनके लिए सिर्फ नौकरी जाने का सवाल नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत, परिवार की उम्मीदों और भविष्य के सपनों पर सीधा आघात है।
उन्होंने कहा कि कई ऐसे अभ्यर्थी भी हैं जिनकी सरकारी नौकरी की निर्धारित उम्र अब निकल चुकी है। उनके लिए दोबारा परीक्षा देना भी आसान नहीं होगा। ऐसे में यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसकी जांच और कार्रवाई जरूर होनी चाहिए, लेकिन निर्दोष अभ्यर्थियों के भविष्य की कीमत पर नहीं।
किशोरी राणा ने कहा कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है तो पूरे मामले की CBI से निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। जांच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी या अभ्यर्थी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। यहां तक कि यदि किसी दोषी ने गलत तरीके से नौकरी हासिल की है तो उसकी नियुक्ति भी समाप्त की जाए। लेकिन जो अभ्यर्थी पूरी ईमानदारी और मेहनत से चयनित हुए हैं, उनकी नौकरी छीनना किसी भी कीमत पर न्यायसंगत नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि जब परीक्षा और नियुक्ति से जुड़ा मामला न्यायालय में विचाराधीन था, तब सरकार को नियुक्ति से पहले सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को पूरी तरह स्पष्ट करना चाहिए था। यदि प्रक्रिया में कहीं चूक या अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, लेकिन उसका बोझ निर्दोष युवाओं के कंधों पर डालना उचित नहीं है।
किशोरी राणा ने सरकार से अपील की कि इस मामले में जल्दबाजी के बजाय न्यायपूर्ण, संवेदनशील और ठोस समाधान निकाला जाए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई भी हो और मेहनत से सफलता हासिल करने वाले युवाओं का भविष्य भी सुरक्षित रहे।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि मेहनत से चयनित युवाओं के साथ अन्याय हुआ तो नव झारखंड फाउंडेशन चुप नहीं बैठेगा। सरकार ने यदि जल्द कोई न्यायसंगत रास्ता नहीं निकाला तो युवाओं के हक में बड़े जन-आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
किशोरी राणा का संदेश साफ है—“गलती करने वालों को सजा मिलनी ही चाहिए, लेकिन जिन युवाओं ने अपनी मेहनत और योग्यता से मुकाम हासिल किया है, उनके सपनों को सजा देना किसी भी न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।”
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