सूचना पट नहीं, तो योजना की जानकारी कैसे मिलेगी? ग्रामीणों ने विभाग से मांगा हिसाब, निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी राशि के इस्तेमाल की जांच की मांग
पाकुड़ ब्यूरो | जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट
लिट्टीपाड़ा। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन जब निर्माण स्थल पर योजना से जुड़ी बुनियादी जानकारी ही सार्वजनिक न हो, तो सवाल उठना लाजिमी है। पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड अंतर्गत हाथीगढ़ गांव में चल रहे पुलिया निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों के बीच इसी तरह के सवाल सामने आ रहे हैं। निर्माण स्थल पर सूचना पट नहीं लगाए जाने से योजना की लागत, स्वीकृत राशि, कार्य एजेंसी, संवेदक और निर्माण अवधि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां लोगों को नहीं मिल पा रही हैं।
मामला सिर्फ सूचना पट तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं और संबंधित विभाग से तत्काल स्थल निरीक्षण कराकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि विभाग इन सवालों पर कितनी गंभीरता दिखाता है और निर्माण कार्य से संबंधित तथ्यों को सार्वजनिक करने के लिए क्या कदम उठाता है।
सूचना पट कहां है? योजना की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं?
ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित सूचना पट दिखाई नहीं देने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि पुलिया निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई है, काम किस विभाग या एजेंसी की देखरेख में हो रहा है और निर्माण पूरा करने की निर्धारित समय-सीमा क्या है।
सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखना और योजना से संबंधित निर्धारित जानकारियों को नियमानुसार प्रदर्शित करना महत्वपूर्ण है। सूचना पट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में संबंधित विभाग से यह स्पष्ट करने की अपेक्षा की जाती है कि योजना का विवरण कहां और किस माध्यम से सार्वजनिक किया गया है।
सवाल सीधा है—जिस निर्माण कार्य पर सरकारी राशि खर्च हो रही है, उसकी लागत और जिम्मेदार एजेंसी की जानकारी आम लोगों को क्यों नहीं मिलनी चाहिए?
निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, तकनीकी जांच जरूरी
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि मौके पर किए जा रहे कुछ कार्यों को देखकर गुणवत्ता के संबंध में संदेह पैदा हो रहा है। हालांकि, निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी पुष्टि सक्षम तकनीकी अधिकारी की जांच और संबंधित अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही की जा सकती है।
ऐसे में केवल आरोप-प्रत्यारोप के बजाय जरूरी है कि विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचें और निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री, कंक्रीट की गुणवत्ता, निर्धारित माप, संरचना की मजबूती तथा स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप किए गए कार्य की जांच करें।
यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है, तो उसे दूर कराने के लिए नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
नियमों के तहत किन बिंदुओं की जांच होनी चाहिए?
हाथीगढ़ पुलिया निर्माण को लेकर उठे सवालों के बीच संबंधित विभाग को निम्नलिखित बिंदुओं की जांच करनी चाहिए—
- योजना का विवरण: स्वीकृत राशि, योजना का नाम, कार्य एजेंसी, संवेदक और निर्माण अवधि से संबंधित जानकारी की जांच।
- सूचना पट: यह पता लगाया जाए कि निर्माण स्थल पर सूचना पट क्यों नहीं लगाया गया और क्या संबंधित योजना के नियमों के अनुसार आवश्यक विवरण प्रदर्शित किया गया है।
- प्राक्कलन के अनुसार निर्माण: स्वीकृत तकनीकी प्राक्कलन और निर्धारित मापदंडों के अनुरूप काम हुआ है या नहीं, इसका सत्यापन।
- निर्माण सामग्री की गुणवत्ता: इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण की मजबूती की तकनीकी जांच।
- मापी पुस्तिका और भुगतान: संबंधित मापी पुस्तिका (Measurement Book), कार्य की प्रगति और भुगतान से जुड़े अभिलेखों का नियमानुसार मिलान।
- जवाबदेही: जांच में कमी या अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार पक्ष के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई।
ग्रामीणों की मांग—कागजों पर नहीं, मौके पर हो जांच
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के वरीय अधिकारियों से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द स्थल निरीक्षण कराया जाए। योजना से संबंधित आवश्यक जानकारी सार्वजनिक की जाए और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष तकनीकी जांच हो।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ तभी सुनिश्चित हो सकता है, जब निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हो और खर्च की गई राशि का उचित उपयोग किया जाए। यदि कहीं कमी पाई जाती है, तो उसे समय रहते ठीक कराया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ग्रामीणों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
अब विभाग की बारी, जवाबदेही तय होगी या सवाल बने रहेंगे?
हाथीगढ़ की पुलिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग की कार्रवाई से ही मिलेगा। क्या अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति की जांच करेंगे? क्या योजना की स्वीकृत राशि और कार्य एजेंसी का विवरण सार्वजनिक किया जाएगा? क्या निर्माण की गुणवत्ता का तकनीकी सत्यापन कराया जाएगा?
फिलहाल, ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—सूचना पट लगवाया जाए, योजना का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए और पुलिया निर्माण की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
इस मामले में संबंधित विभाग और कार्य एजेंसी का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। निर्माण की गुणवत्ता या किसी वित्तीय अनियमितता के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही निकाला जा सकता है।
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